|
कौन हैं अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स? | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अंतरिक्ष यान डिस्कवरी के अमरीका में केप कैनेवरल से उड़ान भरने के साथ ही सुनीता लिन विलियम्स भारतीय मूल की दूसरी अमरीकी अंतरिक्ष यात्री बन गई हैं. अमरीका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने कल्पना चावला के बाद भारतीय मूल की सुनीता लिन विलियम्स को अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन के ‘एक्सपीडिशन-14’ के दल में शामिल किया. नासा के इस ‘एक्सपीडिशन-14’ के दल में सुनीता को फ़्लाईट विशेषज्ञ के पद पर नियुक्त किया गया है. सुनीता की इस क़ामयाबी पर अमरीका में भारतीय मूल के लोग खुशी से फूले नहीं समा रहे हैं. भारत में भी गुजरात के अहमदाबाद शहर में सुनीता के रिश्तेदारों ने ख़ुशी का इज़हार किया है. पिता अहमदाबाद से न्यूयॉर्क से स्थानीय पत्रकार सलीम रिज़वी बताते हैं कि सुनीता की पैदाइश अमरीका के ओहायो में 1965 में हुई थी. उनके पिता 1958 में अहमदाबाद से अमरीका आकर बस गए थे. सुनीता के पिता दीपक पांडया औऱ माँ बोनी पांडया मैसाचुसेट्स राज्य के फ़ाल्मथ शहर में रहते हैं. अपनी बेटी की इस कामयाबी पर वे भी बेहद खुश हैं. इस उड़ान के लिए चुने जाने पर सुनीता की माँ बोनी ने सलीम रिज़वी के साथ बातचीत में कहा था, "अरे.. मैं बता नहीं सकती कि हमें कितनी खुशी हो रही है... सच्ची बात तो यह है कि सुनीता इस मौके का बहुत दिनों से इंतज़ार कर रही थी. अब उसका अंतरिक्ष में उड़ान भरने का सपना पूरा हो जाएगा. वह भी बेहद खुश है और हम सब उसके लिए बहुत खुश हैं." उड़ान भरने से पहले सुनीता के पिता दीपक पांडया का कहना था, "यह भारत के लिए भी गौरव की बात है. हमारे भारत में तो बहुत बड़े-बड़े वैज्ञानिक औऱ राजनीतिक नेता हुए हैं, यह भी उन्हीं की उपलब्धि की तरह ही है. मैं भारत के लिए भी शुभकामनाएँ करता हूँ." सुनीता विलियम्स को 1998 में नासा द्वारा अंतरिक्ष यात्री की हैसियत से चुना गया था. लेकिन उन्हें अब तक अंतरिक्ष में यात्रा करने का मौका नहीं मिला था. वह अंतरिक्ष विज्ञान का ख़ासा ज्ञान रखती हैं और रूस में भी उन्होंने लंबे समय तक प्रशिक्षण भी लिया और काम भी किया है. इससे पहले सुनीता को दसवें मिशन में ‘बैक-अप’ यानि अतिरिक्त या रिज़र्व टीम में रखा गया था. सुनीता के पति माइकल विलियम्स खुद भी पॉयलट हैं और इस समय ओरिगान में पुलिस अधिकारी हैं.
घर में प्यार से सनी बुलाई जाने वाली सुनीता की मेहनत और लगन का ज़िक्र करते हुए उनकी माँ बोनी पांडया कहती हैं, "बचपन से ही सनी ने अपनी पढ़ाई पर पूरा ध्यान दिया और उसके अलावा खेलकूद, तैराकी, पियानो बजाना सीखना, बैले डांस सीखना, इन सबको भी साथ में जारी रखा. और इसी अनुशासन और कड़ी मेहनत का फल आप आज देख रहे हैं." नौसैनिक अकादमी की स्नातकोत्तर स्थानीय पत्रकार सलीम रिज़वी के अनुसार सुनीता अमरीकी नौसैनिक अकादमी की स्नातकोत्तर हैं और इसके अलावा वह एक कुशल लड़ाकू विमान की पॉयलट भी हैं. उन्होंने 30 प्रकार के विभिन्न विमानों पर 2700 से ज़्यादा घंटों की उड़ान भी भरी हुई है औऱ कई अमरीकी सैन्य मिशन पर उन्होने युद्धपोतों पर तैनाती में सप्लाई की उड़ानें भी भरी हैं. नासा में सुनीता अपनी क्लास की पहली वैज्ञानिक हैं जो अंतरिक्ष में यात्रा करने के लिए चुनी गई हैं. अपनी यात्रा के दौरान अंतरिक्ष में सुनीता 'स्पेसवाक' भी करेंगी. जिसके लिए उन्होने रूस में रोबोटिक आर्म के साथ गहन प्रशिक्षण भी लिया है. उम्मीद है कि सुनीता छह महीने तक अतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन पर ही रहेंगी. सन 2003 में नासा के शटल कोलंबिया के हादसे में भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला की मृत्यु ने इस काम में शामिल खतरे को भयानक रूप से सामने रखा था. लेकिन डिस्कवरी की उड़ान से पहले स्थानीय पत्रकार सलीम रिज़वी के साथ बातचीत में सुनीता के माता-पिता अंतरिक्ष की यात्रा में ख़तरे की बात को मानने को तैयार नहीं थे. दीपक पांडया का कहना था, "हम तो सुनीता के इस करियर को चुनने का पूरा सम्मान करते हैं. और हमें कभी कोई डर नहीं लगा. वह एक लंबे समय से अमरीकी नौसेना के साथ है और बहुत से ख़तरनाक मिशन पर उड़ान भी भर चुकी है तो हमें उस पर भरोसा है." उनकी माता का कहना था कि हर जगह खतरे तो होते ही हैं. वह बोलीं,"ख़तरा तो हर चीज़ में होता है. आप कार ही चला रहे हों तो आपका एक्सिडेंट हो सकता है. मतलब यह कि मैं ऐसे विचार अपने दिमाग में नहीं ला सकती. यह उसका करियर है और उसका सपना है. वह अपने सपने की ओर बढ़ रही है और मुझे इसीलिए खुशी है.” सुनीता की माँ का कहना है कि कल्पना चावला से भी सुनीता ने बहुत प्रेरणा ली थी. उन्होंने बताया, "कल्पना चावला तो सुनीता की बहुत अच्छी दोस्त थीं. और सुनीता ने उनसे और उनकी उपलब्धियों से भी बहुत प्रेरणा ली हैं. मुझे पता है कि अब भारतीय लोग उसी तरह सुनीता से भी प्रेरित होंगे.” सुनीता कई बार भारत भी जा चुकी हैं और उन्हे वहां जाना पसंद भी है. लेकिन उन्हें हिंदी बोलने में अब भी मुश्किल होती है. भारत की याद संजोए, खुद एक डॉक्टर उनके पिता ने भारतीय वैज्ञानिकों के लिए कामना की कि विज्ञान के क्षेत्र में सिर्फ़ अंतरिक्ष यात्रा ही नहीं बल्कि पूरे ब्रह्मांड में दूसरे गृहों पर मुनष्यों के जाने की योजनाओं में भी हिस्सा लेंगे. | इससे जुड़ी ख़बरें कल्पना चावला के जीवन पर चित्रकथा05 सितंबर, 2005 | पत्रिका न्यूयॉर्क में कल्पना की याद में सड़क का नाम13 जुलाई, 2004 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||