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डिस्कवरी ने उड़ान भरी | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अंतरिक्ष यान डिस्कवरी ने अमरीका के केप कैनेवरल केंद्र से उड़ान भरी है. डिस्कवरी के सात अंतरिक्ष यात्रियों में भारतीय मूल की सुनीता विलियम्स फ़्लाईट विशेषज्ञ के तौर पर शामिल हैं. अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के अंतरिक्ष शटल कार्यक्रम के तहत चार साल में पहली बार रात के समय किसी अंतरिक्ष यान ने उड़ान भरी है. इससे दो दिन पहले पहले अंतरिक्ष यान डिस्कवरी का प्रक्षेपण ख़राब मौसम के कारण टाल दिया गया था. अंतरिक्ष यात्रा पर जाने वाली सुनीता भारतीय मूल की दूसरी महिला हैं. इससे पहले भारतीय मूल की कल्पना चावला कोलंबिया यान से अंतरिक्ष यात्रा पर गईं थी. वर्ष 2003 में कोलंबिया यान की वापसी के दौरान तकनीकी ख़राबी के कारण यान टुकड़-टुकड़े हो गया था और कल्पना चावला सहित सातों अंतरिक्ष यात्री मारे गए थे. डिस्कवरी मिशन डिस्कवरी अंतरिक्ष यान अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र की ओर बढ़ रहा है. उड़ान भरने के बाद डिस्कवरी ने जल्द ही लगभग दस हज़ार पाँच सौ किलोमीटर की गति प्राप्त कर ली है और वह पृथ्वी के वायुमण्डल में आगे बढ़ रहा है. डिस्कवरी में अंतरिक्ष यात्रियों का लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र में तारें इत्यादि को दोबारा लगाने का पेचीदा काम करना है. नासा ने अपने शटल कार्यक्रम के इतिहास में इस मिशन को सबसे पेचीदा बताया है.
नासा के अनुसार 100 अरब डॉलर की लागत से बनाए जा रहे अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र पर काम ख़त्म करने के लिए ऐसे 14 मिशन ज़रूरी होंगे. डिस्कवरी में सात अंतरिक्ष यात्रियों को जब पृथ्वी पर इस मिशन से जुड़े दल ने बधाई दी तो वहाँ से जवाब आया - "यहाँ पर बहुत से मुस्कुराते चेहरे हैं." डिस्कवरी के दल में पाँच पुरुष और दो महिलाएँ हैं जिनमें भारतीय मूल की सुनीता विलियम्स भी हैं. सुनीता विलियम्स सुनीता विलियम्स के साथ जो अन्य यात्री जा रहे हैं वो अपनी यात्रा 12 दिनों में पूरी कर वापस लौट आएँगे. लेकिन सुनीता डिस्कवरी से वापस नहीं आएँगीं क्योंकि वो कुछ समय अंतरिक्ष केंद्र में बताएँगीं. सुनीता विलियम्स के पिता गुजरात में अहमदाबाद से हैं और उनके अंतरिक्ष में जाने पर अहमदाबाद में उनके रिश्तेदारों में काफ़ी उत्साह है. सुनीता की पैदाइश अमरीका के ओहायो में 1965 में हुई थी. उनके पिता 1958 में अहमदाबाद से अमरीका जाकर बस गए थे. सुनीता के पिता दीपक पांड्या और माँ बोनी पांड्या मैसाचुसेट्स राज्य के फ़ाल्मथ शहर में रहते हैं. सुनीता विलियम्स अंतरिक्ष विज्ञान का ख़ासा ज्ञान रखती हैं और रूस में उन्होंने लंबे समय तक काम किया है. | इससे जुड़ी ख़बरें अंतरिक्ष यात्रा के लिए चुनी गई हैं सुनीता07 मई, 2006 | पहला पन्ना अब नासा की टीम में सुनीता14 फ़रवरी, 2003 | पहला पन्ना चांद पर स्थायी ठिकाने की योजना05 दिसंबर, 2006 | विज्ञान महिला अंतरिक्ष पर्यटक लौटीं29 सितंबर, 2006 | विज्ञान नासा ने दिया अरबों डॉलर का ठेका01 सितंबर, 2006 | विज्ञान अंतरिक्ष यान डिस्कवरी से कुछ टुकड़े गिरे 04 जुलाई, 2006 | विज्ञान 'टुकड़े गिरना चिंता का कारण नहीं'05 जुलाई, 2006 | विज्ञान अटलांटिस का प्रक्षेपण टला27 अगस्त, 2006 | विज्ञान | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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