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अंतरिक्ष यात्रा के लिए चुनी गई हैं सुनीता | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने कल्पना चावला के बाद अब भारतीय मूल की एक और अंतरिक्ष यात्री को उड़ान भरने के लिए चुना है. सुनीता लिन विलियम्स को अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन के ‘एक्सपीडिशन-14’ के दल में शामिल कर लिया गया है. उम्मीद है कि इस साल सितम्बर महीने में सुनीता विलियम्स फ़्लोरिडा के केप केनेरिवल से उड़ान भरेंगी. नासा के इस ‘एक्सपीडिशन-14’ के दल में सुनीता को फ़्लाईट विशेषज्ञ के पद पर नियुक्त किया गया है. इस नियुक्ति के साथ ही सुनीता की इस क़ामयाबी पर भारतीय मूल के लोग खुशी से फूले नहीं समा रहे हैं. सुनीता की पैदाइश अमरीका के ओहायो में 1965 में हुई. उनके पिता 1958 में अहमदाबाद से अमरीका आकर बस गए थे. सुनीता के पिता दीपक पांडया औऱ माँ बोनी पांडया मैसाचुसेट्स राज्य के फ़ाल्मथ शहर में रहते हैं. अपनी बेटी की इस कामयाबी पर बेहद खुश हैं औऱ वह बहुत गौरव महसूस कर रहे हैं. गौरवान्वित माता-पिता सुनीता की माँ बोनी कहती हैं ,“अरे.. मैं बता नहीं सकती कि हमें कितनी खुशी हो रही है... सच्ची बात तो यह है कि सुनीता इस मौके का बहुत दिनों से इंतज़ार कर रही थी. अब उसका अंतरिक्ष में उड़ान भरने का सपना पूरा हो जाएगा. वह भी बेहद खुश है और हम सब उसके लिए बहुत खुश हैं.” सुनीता के पिता दीपक पांडया कहते हैं, “यह भारत के लिए भी गौरव की बात है. हमारे भारत में तो बहुत बड़े-बड़े वैज्ञानिक औऱ राजनेता हुए हैं, यह भी उनमें से एक उपलब्धि की तरह ही है. मैं भारत के लिए भी शुभकामनाएँ करता हूँ.” सुनीता विलियम्स को 1998 में नासा द्वारा अंतरिक्ष यात्री की हैसियत से चुना गया था. लेकिन उन्हें अब तक अंतरिक्ष में यात्रा करने का मौके नहीं मिला था. वह अंतरिक्ष विज्ञान का ख़ासा ज्ञान रखती हैं और रूस में भी उन्होंने लंबे समय तक प्रशिक्षण भी लिया और काम भी किया है. इससे पहले सुनीता को दसवें मिशन में ‘बैक-अप’ यानि अतिरिक्त या रिज़र्व टीम में रखा गया था. सुनीता के पति माइकल विलियम्स खुद भी पॉयलट हैं और इस समय ओरिगान में पुलिस अधिकारी हैं.
घर में प्यार से सनी बुलाई जाने वाली सुनीता की मेहनत और लगन का ज़िक्र करते हुए उनकी माँ बोनी पांडया कहती हैं, “बचपन से ही सनी ने अपनी पढ़ाई पर पूरा ध्यान दिया और उसके अलावा खेलकूद, तैराकी, पियानो बजाना सीखना, बैले डांस सीखना, इन सबको भी साथ में जारी रखा. और इसी अनुशासन और कड़ी मेहनत का फल आप आज देख रहे हैं.” सुनीता अमरीका की नौसैनिक अकादमी की स्नातकोत्तर हैं औऱ इसके अलावा वह एक कुशल लड़ाकू विमान की पॉयलट भी हैं. उन्होंने 30 प्रकार के विभिन्न विमानों पर 2700 से ज़्यादा घंटों की उड़ान भी भरी हुई है औऱ कई अमरीकी सैन्य मिशन पर उन्होने युद्धपोतों पर तैनाती में सप्लाई की उड़ानें भी भरी हैं. नासा में सुनीता अपनी क्लास की पहली वैज्ञानिक हैं जो अंतरिक्ष में यात्रा करने के लिए चुनी गई हैं. अपनी यात्रा के दौरान अंतरिक्ष में सुनीता स्पेसवाक भी करेंगी. जिसके लिए उन्होने रूस में रोबोटिक आर्म के साथ गहन प्रशिक्षण भी लिया है. उम्मीद है कि सुनीता छह महीने तक अतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन पर ही रहेंगी. ख़तरे का डर नहीं सन 2003 में नासा के शटल कोलंबिया के हादसे में भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला की मृत्यु ने इस काम में शामिल खतरे को भयानक रूप से सामने रखा था. लेकिन सुनीता के माता-पिता इस बात को नहीं मानते कि अंतरिक्ष की यात्रा में ज़्यादा खतरा होता है. दीपक पांडया कहते हैं,“हम तो सुनीता के इस करियर को चुनने का पूरा सम्मान करते हैं. और हमें कभी कोई डर नहीं लगा. वह एक लंबे समय से अमरीकी नौसेना के साथ है और बहुत से खतरनाक मिशन पर उड़ान भी भर चुकी है तो हमें उस पर भरोसा है.” उनकी माता का कहना है कि हर जगह खतरे तो होते ही हैं. वह बोलीं,“खतरा तो हर चीज़ में होता है. आप कार ही चला रहे हों तो आपका एक्सिडेंट हो सकता है. मतलब यह कि मैं ऐसे विचार अपने दिमाग में नहीं ला सकती. यह उसका करियर है औऱ उसका सपना है. वह अपने सपने की ओऱ बढ़ रही है और मुझे इसीलिए खुशी है.” सुनीता की माँ कहती हैं कि कल्पना चावला से भी सुनीता ने बहुत प्रेरणा ली थी. वह कहती हैं, “कल्पना चावला तो सुनीता की बहुत अच्छी दोस्त थीं. और सुनीता ने उनसे और उनकी उपलब्धियों से भी बहुत प्रेरणा ली हैं. मुझे पता है कि अब भारतीय लोग उसी तरह सुनीता से भी प्रेरित होंगे.” सुनीता कई बार भारत भी जा चुकी हैं औऱ उन्हे वहां जाना पसंद भी है. लेकिन उन्हें हिंदी बोलने में अब भी मुश्किल होती है. भारत की याद संजोए उनके पिता जो खुद एक डॉक्टर हैं, उभरते हुए भारतीय वैज्ञानिकों से कामना करते हैं कि विज्ञान के क्षेत्र में सिर्फ अंतरिक्ष यात्रा ही नहीं बल्कि पूरे ब्रह्मांड में दूसरे गृहों पर मुनष्यों के जाने की योजनाओं में भी हिस्सा लें. | इससे जुड़ी ख़बरें कल्पना चावला के जीवन पर चित्रकथा05 सितंबर, 2005 | मनोरंजन न्यूयॉर्क में कल्पना की याद में सड़क का नाम13 जुलाई, 2004 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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