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बुधवार, 28 फ़रवरी, 2007 को 15:30 GMT तक के समाचार
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इराक़ सम्मेलन पर ईरान का रुख़ नरम
इराक़ में कार बम विस्फ़ोट
इराक़ में सुरक्षा हालात बहुत नाज़ुक हैं
ईरान ने कहा है कि वह इराक़ में सुरक्षा के मुद्दे पर आयोजित होने वाले एक क्षेत्रीय सम्मेलन में भाग लेने के लिए तैयार है, अगर इससे इराक़ का कुछ फ़ायदा होता है.

इस सम्मेलन में अमरीका ने भी भाग लेने की सहमति व्यक्त की है.

ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष अली लरीजानी ने कहा है कि इस क्षेत्रीय सम्मेलन में भाग लेने के बारे में विचार किया जा रहा है लेकिन ईरान इस रुख़ का हिमायती है कि इराक़ की समस्याओं के हल के लिए हर संभव प्रयास किए जाने चाहिए.

जानकारों का कहना है कि ईरान के ये शव्द सकारात्मक हैं लेकिन इनसे यह संकेत नहीं मिलता कि क्या ईरान वास्तव में इस क्षेत्रीय सम्मेलन में भाग लेने के लिए तैयार है.

मध्य मार्च में प्रस्तावित इस क्षेत्रीय सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, अरब लीग और इराक़ के पड़ोसी देश भाग लेंगे. अमरीका ने भी इसमें भाग लेने की बात कही है और ईरान और सीरिया ऐसे देश हैं जिन पर अमरीका इराक़ में अस्थिरता फैलाना का आरोप लगाता है.

इसके अलावा अमरीका ईरान पर यह भी आरोप लगाता है कि वह परमाणु हथियार बनाने की कोशिश में लगा है जबकि ईरान कहता है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है.

इस सम्मेलन से उम्मीद लगाई जा रही है कि इराक़ में जातीय हिंसा रोकने में कुछ मदद मिल सकेगी.

कूटनीति का सहारा

ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष अली लरीजानी ने कहा है, "हम प्रस्ताव पर विचार कर रहे हैं, हम इराक़ की तमाम समस्याओं का समाधान हर संभव तरीके से हल किए जाने के हिमायती हैं और अगर इसकी उम्मीद नज़र आएगी तो हम सम्मेलन में भाग लेंगे."

लरीजानी ने कहा, "हमारा मानना है कि इराक़ में सुरक्षा का मुद्दा सभी पड़ोसी देशों से जुड़ा हुआ है और स्थिति में सुधार के लिए उन पड़ोसी देशों को मदद करनी होगी."

इराक़ में अमरीकी सैनिक
इराक़ में अमरीकी सैनिकों पर भी हमले हो रहे हैं

बीबीसी संवाददाता पैम ओ टूली का कहना है कि ईरान ने इस सम्मेलन में भाग लेने के बारे में फ़ैसले पर इसलिए विचार करना जारी रखा है क्योंकि वह अमरीकी एजेंडे को जानने की कोशिश कर रहा है.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि कुछ ईरानी अब भी उस समय को शायद नहीं भूले होंगे जब ईरान ने 2001 में अफ़ग़ानिस्तान के मुद्दे पर हुए सम्मेलन में सहयोग किया था लेकिन उसके कुछ ही समय बाद अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने ईरान को "शैतानियत की धुरी" का हिस्सा क़रार दे दिया था.

हाल के समय में अमरीका ईरान पर आरोप लगाता रहा है कि वह इराक़ में शिया लड़ाकों को अमरीकी सैनिकों पर हमले करने के लिए हथियार दे रहा है. ईरान इन आरोपों को "निराधार दुष्प्रचार" बताते हुए ख़ारिज करता है.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इराक़ पर होने वाले सम्मेलन में ईरान का नाम मेहमानों की सूची में शामिल किए जाने से ईरान को यह तसल्ली तो हो सकती है कि उसे अमरीका से यह पहचान तो मिली है कि ईरान की मदद के बिना इराक़ की समस्या को नहीं सुलझाया जा सकता.

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