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उत्तर कोरिया के साथ बातचीत पर सहमति | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
कूटनीतिक प्रयासों के बाद उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम को लेकर छह देशों की बातचीत जल्द शुरू करने पर सहमति हुई है. अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने उत्तर कोरिया को मनाने के लिए चीन का आभार जताया है. राष्ट्रपति बुश ने कहा कि अमरीका चाहेगा कि उत्तर कोरिया अपना परमाणु कार्यक्रम बंद कर दे. ये सहमति बीजिंग में उत्तर कोरिया, चीन और अमरीका के बीच अनौपचारिक बातचीत में हुई. परमाणु परीक्षण के बाद पहली बार अमरीका के विशेष दूत क्रिस्टोफर हिल ने उत्तर कोरिया के अधिकारियों से मुलाक़ात की. एक अमरीकी अधिकारी का कहना था कि यह स्पष्ट है कि चीन से उत्तर कोरिया को संदेश मिला है कि ऐसे परीक्षण स्वीकार नहीं किए जाएँगे. इस बातचीत के हिस्सेदार दक्षिण कोरिया, रूस और जापान ने इसका स्वागत किया है. बातचीत एक साल पहले उत्तर कोरिया ने अमरीकी के आर्थिक प्रतिबंध लगाने के विरोध में बातचीत बंद कर दी थी. छह देशों की चर्चा आख़िरी बार सितंबर, 2005 में हुई थी जिसमें यह वादा किया गया था कि यदि उत्तर कोरिया अपने परमाणु कार्यक्रम को रोक देता है तो उसे आर्थिक मदद दी जाएगी. उत्तर कोरिया ने नौ अक्तूबर को परमाणु परीक्षण कर अंतरराष्ट्रीय जगत को हिला दिया था. उसके बाद संयुक्त राष्ट्र ने उसके ख़िलाफ़ आर्थिक और सैन्य प्रतिबंध लगा दिए थे. माना जाता है कि 1994 तक उत्तर कोरिया ने परमाणु कार्यक्रम पर अमल किया और फिर अचानक सभी परमाणु गतिविधियाँ रोक देने का ऐलान कर दिया था. लेकिन दिसंबर, 2002 में उसने परमाणु कार्यक्रम को फिर शुरू कर दिया और संयुक्त राष्ट्र निरीक्षकों को निकाल बाहर किया था. |
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