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क्या उत्तर कोरिया पर असर पड़ेगा? | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
उत्तर कोरिया पर प्रतिबंधों के लिए सुरक्षा परिषद में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित होना अंतरराष्ट्रीय एकजुटता को दिखाता है. लेकिन क्या ये उत्तर कोरिया को अपने परमाणु कार्यक्रम पर फिर से विचार करने के लिए विवश कर सकेंगे? अमरीका को चीन और रूस को अपने साथ बनाए रखने के लिए प्रस्ताव में संशोधन करने पड़े. इसके बावजूद चीन को उत्तर कोरिया को परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम से संबंधित सामग्री की बिक्री न करने के लिए तैयार कर लेना महत्वपूर्ण प्रगति है. चीन और रूस दोनों का दबाव था कि उत्तर कोरिया के ऊपर धारा 41 के तहत ही प्रतिबंध लगाया जाए यानी कि प्रतिबंध की प्रकृति आर्थिक हो और उसमे सैन्य कार्रवाई का विकल्प न हो. हालाँकि ये अब भी अनुच्छेद सात के तहत हैं जिसका मतलब है कि इसे सभी सदस्य देशों को लागू करना होगा. उत्तर कोरिया को विलासिता के सामान की बिक्री पर प्रतिबंध किम जोंग इल पर प्रतीकात्मक हमला है. वे अच्छे सामानों के शौकीन हैं और अब उन्हें इसकी दिक्कत होगी. चीन का प्रभाव पूरे मामले में यह भी बात सामने आ गई कि अपने बढ़ते प्रभाव के बीच चीन किस प्रकार सावधानी और शर्तों के साथ सहयोगात्मक रवैया अपनाते हुए आगे आगे बढ़ना चाहता है.
सदस्य राष्ट्रों से उत्तर कोरिया के समुद्री जहाजों से आने जानेवाले सामानों की जाँच करने के लिए की गई अपील को लेकर चीन के अपने विचार हैं और वह इसे लागू भी नहीं करेगा. लेकिन उसने प्रस्ताव को वीटो नहीं किया. जबकि प्रस्ताव में सैन्य कार्रवाई के विकल्प को ख़त्म करवाकर उसने अपने हित सुरक्षित कर लिए. इस पर मतदान बुश प्रशासन की विदेश नीति की वर्तमान दशा को भी दिखाता है. वह सैन्य ताकत की सीमाओं को जानता है और इस समय उत्तर कोरिया पर हमला करने की स्थिति में नहीं है इसलिए उसने संयुक्त राष्ट्र के माध्यम से आर्थिक कार्रवाई को ही बेहतर समझा. अब देखना यह है कि क्या अमरीका ईरान में भी इसी विकल्प को अपनाता है? दूसरी तरफ यह भी एक तथ्य है कि न तो अंतरराष्ट्रीय दबाव और न ही कोई लालच उत्तर कोरिया को उसके इरादों से डिगा सका. उत्तर कोरिया अपने परमाणु कार्यक्रम को छोड़ने के लिए गत सितंबर में छह देशों से बातचीत करने के लिए तैयार हो गया था. इसके बदले अमरीका ने उसे बिजली आपूर्ति करने का वादा किया था और दोनों देशों ने एक-दूसरे को ‘‘शांतिपूर्ण सह अस्तित्व’’ पर अमल करने का भरोसा भी दिलाया था. उत्तर कोरिया ने अमरीका पर ‘‘आर्थिक शत्रुता’’ निभाने का आरोप लगाया है और जब तक दोनों इस मसले को सुलझा न लें, इनके बीच वार्ता की संभावना नहीं है. इस बात को लेकर भी शंका है कि दोनों देशों के बीच एक बार फिर गंभीर वार्ता शुरू हो भी पाएगी. | इससे जुड़ी ख़बरें एशियाई देशों ने प्रतिबंधों का स्वागत किया15 अक्तूबर, 2006 | पहला पन्ना उत्तर कोरिया के ख़िलाफ़ प्रस्ताव पर सहमति14 अक्तूबर, 2006 | पहला पन्ना 'स्पष्ट प्रस्ताव में उत्तर कोरिया की निंदा हो'14 अक्तूबर, 2006 | पहला पन्ना नए प्रस्ताव में प्रतिबंधों का प्रावधान13 अक्तूबर, 2006 | पहला पन्ना 'और परमाणु परीक्षण कर सकते हैं'11 अक्तूबर, 2006 | पहला पन्ना उत्तर कोरिया को मनाने में जुटा रुस06 अक्तूबर, 2006 | पहला पन्ना जॉर्ज बुश ने कहा, सुरक्षा परिषद तुरंत कार्रवाई करे09 अक्तूबर, 2006 | पहला पन्ना उत्तर कोरिया ने किया परमाणु विस्फोट09 अक्तूबर, 2006 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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