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क्या है आख़िर यह सारा मामला..? | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
चाहे सुरक्षा परिषद की बैठक बुलाई जाए या फिर पाबंदियाँ लगाने की धमकी दी जाए लगता यह है कि इस स्थिति का तुरत फुरत कोई हल नहीं निकल सकता. वर्ष 2003 में दक्षिण कोरिया में नए राष्ट्रपति को बागडोर सँभालनी थी कि कुछ ही घंटे पहले उत्तर कोरिया ने मिसाइल परीक्षण कर दिया और अब की बार किए गए परीक्षण की तारीख़ चुनी गई चार जुलाई यानी अमरीका का स्वतंत्रता दिवस. जो बात अमरीका और पश्चिमी मुल्कों को खाए जा रही है वो ये है कि उत्तर कोरिया पहले ही परमाणु अप्रसार संधि से हाथ झाड़ चुका है और ऐलान कर चुका है कि उसके पास परमाणु हथियार हैं. और अब तो वो लंबी मार करने वाली मिसाइलों का परीक्षण भी कर चुका है. प्रस्तुत हैं इस मामले से जुड़े कुछ सवाल और उनके जवाब. उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम के बारे में बाहरी दुनिया के पास क्या जानकारी है? कई विशेषज्ञों का मानना है कि 1994 तक उत्तर कोरिया ने परमाणु कार्यक्रम पर अमल किया और फिर अचानक सभी नाभिकीय गतिविधियाँ रोक देने का ऐलान किया. लेकिन दिसंबर 2002 में उसने योंगब्योन में अपने नाभिकीय रिएक्टर को फिर शुरू कर दिया और संयुक्त राष्ट्र के निरीक्षकों को निकाल बाहर किया. इस रिएक्टर में तैयार परमाणु ईंधन से हर साल एक परमाणु बम तैयार किया जा सकता है. अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसी सीआईए कहती है कि इसके अलावा अगर यूरेनियम से परमाणु ईंधन बनाया जाता रहा हो तो हर साल दो से तीन परमाणु हथियार बनाए जा सकते हैं. उत्तर कोरिया के पास कितने परमाणु हथियार हो सकते हैं?
संयुक्त राष्ट्र की परमाणु ऊर्जा एजेंसी के निरीक्षण से पहले ये कहना बहुत मुश्किल है. अमरीकी अधिकारी कहते हैं कि एक या दो बम तो बना ही लिए होंगे. लेकिन उत्तर कोरिया कहता है कि उसने परमाणु तत्व की छड़ों का प्रसंस्करण पूरा कर लिया है. अब नए परीक्षणों का क्या अर्थ है? अमरीका और उत्तर कोरिया के पड़ोसी देश अगर किसी बात से दिलासा ले सकते हैं तो वो ये है कि टीपोडोंग-दो नाम की लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइल का परीक्षण नाकाम हो गया. छोड़े जाने के चालीस सेकेंड बाद ही वो बेकार हो गई. इसके अलावा एक के बाद एक करके पाँच और मिसाइलों का परीक्षण किया गया, लेकिन ये पहले से ही टेस्ट की जा चुकी स्कड मिसाइलें थीं. इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फ़ॉर स्ट्रीटीजिक स्टडीज़. लंदन के मार्क फ़िट्ज़पैट्रिक का कहना है कि उत्तर कोरिया ये साफ़ साफ़ संदेश देना चाह रहा है कि वो किसी की डाँट-डपट या धौंसपट्टी में नहीं आने वाला. तो फिर इस संकट का असल कारण क्या है? आपको याद होगा कि 11 सितंबर के हमलों के कुछ ही महीने बाद जनवरी 2002 में अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने उत्तर कोरिया को खलनायकों के गठबंधन या एक्सिस ऑफ़ ईविल का हिस्सा बताया था. तभी से उत्तर कोरिया भड़क गया और दोनों देशों के संबंध गर्त में चले गए. उसी साल अक्तूबर में अमरीका ने उत्तर कोरिया पर गुप्त रूप से परमाणु कार्यक्रम चलाने का आरोप लगाया. जवाब में उत्तर कोरिया ने ठंडे पड़े हुए एक परमाणु ऊर्जा केंद्र को पुनर्जीवित कर दिया, परमाणु निरीक्षक एजेंसी के निरीक्षकों को निकाल बाहर किया. परमाणु अप्रसार संधि को दरकिनार कर दिया और कुछ समय बाद दुनिया को बताया कि अब उसके पास परमाणु हथियार हैं. क्या इससे पहले कभी उत्तर कोरिया ने परमाणु हथियारों की धमकी नहीं दी? वर्ष1993 में लंबी बातचीत के बाद उत्तर कोरिया एक बार अपना परमाणु कार्यक्रम बंद करने को तैयार हो गया था. बदले में उसे भारी ईंधन तेल और दो बिजली बनाने वाले रिएक्टर दिए जाने थे. लेकिन उत्तर कोरिया को दिया गया ये वचन पूरा नहीं किया गया और मौजूदा संकट के बीज बोए गए. | इससे जुड़ी ख़बरें उत्तर कोरिया ने मिसाइलों का परीक्षण किया04 जुलाई, 2006 | पहला पन्ना मिसाइल परीक्षण पर कड़ी प्रतिक्रिया05 जुलाई, 2006 | पहला पन्ना उत्तर कोरिया के परीक्षणों की आलोचना05 जुलाई, 2006 | पहला पन्ना उत्तर कोरिया ने और 'परीक्षण' किए05 जुलाई, 2006 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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