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शनिवार, 21 अक्तूबर, 2006 को 13:35 GMT तक के समाचार
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इराक़ में रणनीति बदलते रहे हैं: जॉर्ज बुश
अमरीकी सैनिक
इराक़ में अमरीकी सैनिकों पर हमले बढ़े हैं
अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने कहा है कि इराक़ में अमरीकी सेना विद्रोहियों के ख़तरों से निपटने के लिए अपनी रणनीति में बदलाव करती रही है.

अपने साप्ताहिक रेडियो संदेश में राष्ट्रपति बुश ने स्वीकार किया कि रमज़ान का पवित्र महीना अमरीकी और इराक़ी सेना के लिए काफ़ी मुश्किल भरा रहा है.

उन्होंने कहा, "रमज़ान के पवित्र महीने के शुरू में हिंसा की घटनाओं में काफ़ी तेज़ी आई. इसके कई कारण हैं. एक कारण ये भी है कि गठबंधन सेना और इराक़ी सैनिकों ने राजधानी बग़दाद की सुरक्षा व्यवस्था चुस्त-दुरुस्त करने के लिए कई अभियान चलाए."

इराक़ में पिछले कुछ समय से हिंसा की घटनाओं में तेज़ी आ रही है. राष्ट्रपति बुश का कहना है कि इराक़ में हिंसा से निपटने के लिए रणनीति बदलने पर विचार हो सकता है.

हालाँकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अमरीका इराक़ में अपनी पूरी सैनिक रणनीति में बदलाव नहीं करेगा.

दूसरी ओर रक्षा मंत्री डोनाल्ड रम्सफ़ील्ड का कहना है कि इराक़ियों को सुरक्षा की ज़िम्मेदारी संभालने में अब ज़्यादा देर नहीं करनी चाहिए.

राष्ट्रपति बुश और रक्षा मंत्री रम्सफ़ील्ड का बयान ऐसे समय आया है जब अमरीका में मध्यावधि चुनाव होने वाले हैं और कहा जा रहा है कि इराक़ नीति के कारण राष्ट्रपति बुश की पार्टी को नुक़सान हो सकता है.

कई जनमत सर्वेक्षणों के अनुसार अमरीकी जनता का मानना है कि इराक़ में राष्ट्रपति बुश की रणनीति नाकाम रही है.

वॉशिंगटन से बीबीसी संवाददाता जस्टिन वेब का कहना है कि अगर आंकड़ों पर भरोसा करें तो अगले महीने होने वाले मध्यावधि चुनाव में राष्ट्रपति बुश की पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ सकता है.

ये भी हो सकता है कि कांग्रेस में डेमोक्रेटिक पार्टी का बहुमत हो जाए और राष्ट्रपति बुश की स्थिति और कमज़ोर हो जाए.

दबाव की नीति

विरोधी डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं ने भी जार्ज बुश पर दवाब बनाना शुरू कर दिया है. वे मांग कर रहे हैं कि इस साल के अंत तक इराक़ से अमरीकी सैनिकों की चरणबद्ध वापसी शुरू हो जाए.

इसके साथ ही वे चाहते हैं कि राष्ट्रपति बुश एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन बुलाएँ ताकि इराक़ मसले का राजनीतिक हल ढूँढ़ने की कोशिश की जाए.

इस बीच इराक़ में हिंसा की घटनाएँ लगातार बढ़ रही हैं. दक्षिणी शहर अमारा में मुक़्तदा-अल-सद्र समर्थक विद्रोहियों और इराकी पुलिस के बीच संघर्ष में कम से कम 31 लोग मारे गए हैं.

मध्यावधि चुनाव से पहले राष्ट्रपति बुश पर काफ़ी दबाव है

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि अमारा में हुई हिंसा इराक़ी सरकार की भी कड़ी परीक्षा है जो देश में जातीय हिंसा को रोकने की कोशिश कर रही है.

अगस्त में ही ब्रितानी सेना ने अमारा का नियंत्रण इराक़ी सुरक्षा बलों को सौंप दिया था. अब ब्रितानी सेना का कहना है कि अगर आवश्यकता पड़ी तो वे एक बार फिर अमारा में जा सकते हैं.

इराक़ के विदेश मंत्री होशयर ज़ेबारी ने बीबीसी को बताया कि अमारा के संबंध में रणनीति पर फिर से विचार किया जाएगा.

उन्होंने कहा कि इराक़ी और अंतरराष्ट्रीय सैनिक मिल-बैठकर ये विचार-विमर्श करेंगे कि क्या अमारा और उसके आसपास के प्रांतों में ऐसे हालात हैं कि वहाँ का नियंत्रण इराक़ी सैनिकों को सौंपा जा सके.

दूसरी ओर अमारा में हुई हिंसा के बारे में अमरीकी रक्षा मंत्री रम्सफ़ील्ड का कहना है कि अमरीकी सैनिक समय-समय पर अमारा में अपना सहयोग देते रहे हैं लेकिन आख़िरकार इराक़ियों को अपनी सुरक्षा व्यवस्था ख़ुद ही संभालनी होगी.

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