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बुधवार, 11 अक्तूबर, 2006 को 13:37 GMT तक के समाचार
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इराक़ में मृतक संख्या 'साढ़े छह लाख'
इराक़
इराक़ में जातीय हिंसा भी हो रही है
एक अमरीकी विश्वविद्यालय के सर्वेक्षण में कहा गया है कि इराक़ पर अमरीकी नेतृत्व वाले गठबंधन के 2003 में हुए हमले के बाद से लगभग छह लाख 55 हज़ार लोगों की मौत हो चुकी है जो, अगर हमला नहीं हुआ होता तो शायद जीवित होते.

इस सर्वेक्षण में 47 इलाक़ों में होने वाली मौतों का जायज़ा लिया कि 2003 में हमला होने से पहले वहाँ मृत्यु दर क्या थी और हमला होने के बाद वहाँ मृत्यु दर क्या हो गई है.

इस सर्वेक्षण पर यक़ीन किया जाए तो इराक़ में 2003 के हमले के बाद से मारे गए लोगों की संख्या के बारे में जो आधिकारिक आँकड़ें हैं या फिर मीडिया को जो आँकड़े उपलब्ध हैं, सर्वे में अनुमानित संख्या उससे बहुत ज़्यादा है.

लेकिन आलोचकों ने इस सर्वेक्षण की यह कहते हुए आलोचना की है कि क्योंकि वे अनुमान के आँकड़ों पर आधारित हैं न कि वास्तविक शवों की गिनती पर.

दूसरी तरफ़ अमरीका के बाल्टीमोर में जॉन हॉपकिन्स ब्लूमबर्ग स्कूल ऑफ़ पब्लिक हैल्थ के डॉक्टर गिलबर्ट बर्नहैम का कहना है कि इराक़ में हिंसा के हालात और ख़तरों को देखते हुए सर्वेक्षण की जो प्रक्रिया हमने अपनाई, वह ज़्यादा भरोसेमंद है.

इस सर्वेक्षण में बताई गई मृतक संख्या पर यक़ीन किया जाए तो यह इराक़ की कुल आबादी का लगभग ढाई प्रतिशत हिस्सा है और हमला होने के बाद से औसतन 500 मौतें हर दिन हुई हैं.

संख्या में बढ़ोत्तरी

इस सर्वेक्षण में शोधकर्ताओं ने इराक़ के लॉटरी से चुने गए 47 क्षेत्रों में 1850 परिवारों से बात की जिनके सदस्यों की संख्या 12 हज़ार 800 से ज़्यादा थी.

इन परिवारों में जो 629 मौतें हुई थीं उनमें से 13 प्रतिशत मौतें मार्च 2003 में हमला होने से पहले के 14 महीनों में हुई थीं और हमला होने के बाद के 40 महीनों में होने वाली मौतों का प्रतिशत 87 था.

इराक़ में हिंसा और मौतें
इराक़ में हर रोज़ अनेक लोग मारे जा रहे हैं

सर्वेक्षण में पाया गया कि मौतों में हुई इस वृद्धि की दर पूरे देश में लगभग एक जैसी पाई गई और इसकी वजह से वार्षिक मृत्यु दर 5.5 प्रतिशत प्रति एक हज़ार से बढ़कर 13.3 प्रतिशत प्रति एक हज़ार हो गई.

सर्वेक्षणकर्ताओं का कहना है कि जिन घरों में मौतें हुईं उनमें 80 प्रतिशत मामलों में परिजनों ने अपने दावों के समर्थन में मृत्यु प्रमाण-पत्र भी दिखाए.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इराक़ में शिया-सु्न्नी हिंसा और अमरीका के विरोध में हिंसक गतिविधियों की वजह से वहाँ बहुत ठोस आँकड़ें हासिल करना तो मुश्किल काम है क्योंकि असैनिक शोधकर्ताओं के लिए ऐसे हालात में काम करना बहुत ख़तरनाक है.

इस सर्वेक्षण में भी पहले के इसी तरह के एक सर्वेक्षण के नतीजों की पुष्टि की गई है. उस सर्वेक्षण में कहा गया था कि मार्च 2003 में हमले के बाद से अप्रैल 2004 तक लगभग एक लाख इराक़ी मारे जा चुके थे.

उस समय भी अमरीकी नेतृत्व वाले विदेशी गठबंधन के इराक़ पर हमले के बहुत से समर्थकों ने उन आँकड़ों की आलोचना की थी.

आलोचकों ने इराक़ बॉडी काउंट यानी इराक़ में मतृकों की संख्या का हिसाब रखने वाले संगठन क पेश किए हुए आँकड़ों - 49 हज़ार और इस सर्वेक्षण में बताए गए छह लाख 55 हज़ार के आँकड़ों के बीच बड़े अंतर की तरफ़ ध्यान दिलाया है.

इस पर सर्वेक्षण करने वाली टीम का कहना है कि उन मामलों में ये हो सकता है कि बहुत से परिवारों ने मौत की जानकारी ही नहीं दी हो, कुछ गुमनाम मौतें भी हो सकती हैं और बच्चों की मौत की ख़बरे सामने नहीं आना भी कुछ चिंताएँ हो सकती हैं.

सर्वेक्षण में कहा गया है कि क़रीब छह लाख के आसपास मौतें हिंसा की वजह से हो सकती हैं और कुल मौतों में से 31 प्रतिशत अमरीकी नेतृत्व वाले गठबंधन की सेनाओं की कार्रवाई की वजह से हो सकती हैं.

यह सर्वेक्षण ब्रिटेन की एक मेडिकल पत्रिकार लेंसेट में प्रकाशित हो रही हैं.

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