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थाईलैंड में राजनीतिक दलों पर प्रतिबंध | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
थाईलैंड में तख़्तापलट के बाद शासन की बागडोर संभाल रहे सैनिक अधिकारियों ने देश में किसी भी तरह की राजनीतिक गतिविधि पर रोक लगा दी है. टीवी पर जारी किए गए एक बयान में कहा गया है कि देश में क़ानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए ऐसा करना ज़रूरी है. यह नहीं बताया गया है कि यह रोक कितने समय के लिए है. टीवी पर दिए गए बयान में सिर्फ़ इतना कहा गया है कि स्थिति सामान्य होने पर यह रोक हटा ली जाएगी. इससे पहले विपक्षी नेता अबिशित वेजाजिवा ने सेना से कहा था कि वे छह महीने के भीतर देश में लोकतांत्रिक चुनाव कराएँ. तख़्तापलट की अगुआई करने वाले जनरल सोन्थी बून्यारातग्लिन ने कहा है कि एक वर्ष की अवधि तक यह व्यवस्था लागू रहेगी जब तक कि देश का नया संविधान तैयार नहीं हो जाता. मंगलवार को प्रधानमंत्री टाकसिन चिनवाट का तख़्ता पलट होने के बाद गुरूवार को पहली बार देश में लोग अपने-अपने काम पर लौटे. राजधानी बैंकॉक की सड़कों पर टैंक अब भी गश्त लगा रहे हैं लेकिन सेना की मौजूदगी पहले से कम दिख रही है. बीबीसी के संवाददाता जॉनाथन हेड का कहना है कि राजनीतिक पार्टियों पर लगा प्रतिबंध लोगों को चिंता में डाल रहा है क्योंकि पहले यही माना जा रहा था कि नई व्यवस्था बहुत सख्त नहीं होगी. थाईलैंड में हर तरह की राजनीतिक गतिविधि पर रोक लगाया गया है जिसमें नई राजनीतिक पार्टियों का गठन भी शामिल है. मार्शल लॉ थाईलैंड में तख़्तापलट होने के बाद से लागू मार्शल लॉ लागू है जिसके तहत पहले ही कहीं भी पाँच से अधिक व्यक्तियों के जमा होने पर रोक है. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इस तख़्तापलट का अब तक कोई विरोध दिखाई नहीं दिया है. अबिशित वेजाजिवा डेमोक्रेट पार्टी के नेता हैं जो अपदस्थ प्रधानमंत्री चिनावट के मुख्य प्रतिद्वंद्वी रहे हैं, उन्होंने इतना ही कहा है कि वे सैनिक प्रशासन के क़दम को लेकर बहुत चिंतित नहीं हैं लेकिन कुछ स्पष्टीकरण चाहते हैं. उन्होंने कहा है कि देश में अगल छह महीने के भीतर चुनाव होने चाहिए, उन्होंने कहा कि देश में नए संविधान की कोई ज़रूरत नहीं है. |
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