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थाईलैंड की सेना दक्षिण को रवाना | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
थाईलैंड की सेना को और हिंसा की आशंका के चलते देश के दक्षिणी हिस्सों में भेज दिया गया है. मुसलमान बहुल इस इलाक़े में बुधवार को सुरक्षा चौकियों पर हमले हुए थे जिसमें 100 लोग मारे गए थे. इस हमले को दबाने के बाद भी हिंसा की आशंका बनी हुई है और इसे देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था पुख़्ता करने के लिए सैनिकों की दो अतिरिक्त बटालियनें दक्षिणी हिस्सों की ओर भेजी गई हैं. सेना के उच्च अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि इस्लामी समूह कुछ और हमले कर सकते हैं जबकि देश के प्रधानमंत्री थकसिन शिनवात्रा का कहना है कि ये हमले आपराधिक गैंगों ने किए हैं. इस बीच बुधवार को हुए हमले को कुचलने के लिए जिस तरह सेना का इस्तेमाल किया गया उस पर कुछ मुसलमान नेताओं और मानवाधिकार संगठनों ने सवाल उठाए हैं. 'चौकसी बरते सेना' उधर देश के रक्षा मंत्री चेत्था थनजारो का कहना था, "सेना को पूरी चौकसी बरतनी चाहिए और दूसरे या तीसरे दौर के हमलों के लिए पूरी तरह तैयार रहना चाहिए." बुधवार को हुए हमलों के दौरान पट्टनी क्षेत्र में एक मस्जिद में शरण लिए हमलावरों को निशाना बनाने वाले अभियान के प्रमुख जनरल पैलॉप पिनमानी भी इस बात से सहमत हैं. उन्होंने बैंकॉक रेडियो को बताया, "मैं कहना चाहूँगा कि सेना का अभियान तो एक तरह से अभी शुरू ही हुआ है. हमारा अभी आकलन है कि उन लोगों के सशस्त्र बल की क्षमता हज़ारों में है." जनरल पिनमानी इस बात से पूरी तरह आश्वस्त हैं कि हमले मुसलमान अलगाववादियों ने ही किए हैं. रक्षा मंत्री थनजारो ने तो इस बात की भी आशंका जताई है कि उनमें से कुछ को विदेश में प्रशिक्षण दिया गया हो. उन्होंने बताया कि जो लोग भी मारे गए वे अधिकतर युवा थे मगर उनका नेतृत्व 30-40 साल के बीच के किसी व्यक्ति के हाथ में था. युवाओं के हाथ में तो तलवारें थीं मगर उनके नेताओं के हाथ में एके-47 राइफ़लें थीं. रक्षा मंत्री के बयान के उलट प्रधानमंत्री और प्रशासन के अन्य लोगों के बयान आए हैं. थाईलैंड के प्रमुख अख़बार 'द नेशन' ने प्रधानमंत्री और सेना प्रमुख के इस आकलन को ग़लत ठहराया है कि ये हमले आपराधिक समूहों ने किए थे. |
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