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बुधवार, 28 अप्रैल, 2004 को 03:51 GMT तक के समाचार
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थाईलैंड में हिंसा, 107 की मौत
मारे गए हमलावरों को देखते थाई सुरक्षाकर्मी
इन हमलों के बाद इस्लामी चरमपंथ के फिर से उभरने की आशंका व्यक्त की जा रही है
थाईलैंड में संदिग्ध मुस्लिम चरमपंथियों ने दक्षिण के दो प्रांतों में एक साथ कई पुलिस ठिकानों और नाकों पर हमले किए हैं.

थाईलैंड के सेना प्रमुख चाइयासिध शिनवात्रा का कहना है कि इस संघर्ष में 107 लोग मारे गए हैं.

उधर थाईलैंड के प्रधानमंत्री थकसिन शिनवात्रा का कहना है कि इन हमलावरों को स्थानीय नेता और नशीले पदार्थों का व्यापार करने वाले गैंग आर्थिक मदद दे रहे हैं.

वहीं अधिकारियों के अनुसार पट्टनी प्रांत में एक मस्जिद में जा छिपे हमलावरों के साथ हुए संघर्ष में 30 लोग मारे गए.

याला प्रांत के पुलिस प्रमुख का कहना है कि काले कपड़े पहने और हाथों में बंदूकें उठाए कुछ युवकों के समूह ने तड़के ही चौकियों पर हमले किए.

मारे गए अधिकतर लोग हमलावर ही थे. सैनिक अधिकारियों के अनुसार उन्हें इस तरह के हमलों की चेतावनी पहले ही मिल गई थी.

उनका कहना है कि कुछ हमलावरों को मस्जिद में घेर लिया गया है और संभावना व्यक्त की जा रही है कि उन्हें ज़िंदा पकड़ा जा सकेगा जिससे हमले की वजह के बारे में उनसे पूछताछ की जा सके.

प्रधानमंत्री शिनवात्रा के अनुसार ये युवक हथियार चुराने की कोशिश कर रहे थे.

यला प्रांत में चार सुरक्षाकर्मी भी इस संघर्ष में घायल हुए हैं जबकि पट्टनी और सोंगखला प्रांतों में भी ये हमला हुआ है.

संवाददाताओं का कहना है कि ताज़ा हिंसा ये दर्शाती है कि दक्षिणी थाईलैंड में हिंसा एक बार फिर भड़क उठी है.

बीबीसी संवाददाता काइली मॉरिस का कहना है कि थाई अधिकारी हिंसा के लिए मुस्लिम चरमपंथियों को ज़िम्मेदार ठहरा रहे हैं.

मगर मुस्लिम नेताओं ने सरकार पर आरोप लगाया है कि वह स्थिति को बदतर बना रही है.

हिंसा

दक्षिणी थाईलैंड में हिंसा की शुरूआत जनवरी में हुई जब यहाँ एक सैनिक ठिकाने पर हमला हुआ और चार सैनिक मारे गए थे.

तब से अब तक यहाँ हिंसा की अलग-अलग घटनाओं में कम-से-कम 60 लोग मारे जा चुके हैं.

यहाँ के स्थानीय मुसलमान लंबे समय से नौकरियों और शिक्षा क्षेत्र में भेदभाव किए जाने की शिकायत करते रहे हैं.

थाईलैंड में बौद्ध धर्म माननेवालों की आबादी सबसे अधिक है.

इनमें यला, पट्टनी और नरथीवाट ऐसे तीन प्रांत हैं जहाँ मुसलमानों की संख्या बौद्धों से अधिक है.

अब ये आशंका व्यक्त की जा रही है कि इस्लामी अलगाववाद इन इलाक़ों में लौट रहा है और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क भी इन्हें समर्थन दे रहे हैं.

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