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थाईलैंड के राजनीतिक संकट की वजह? | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारी विरोध के बाद टकसिन चिनावाट ने थाईलैंड के प्रधानमंत्री का पद छोड़ने का फ़ैसला किया है. इससे वहाँ राजनीतिक संकट गहरा गया है. इस राजनीतिक संकट की वजह क्या है? थाईलैंड में किसी भी मतदाता ने ये उम्मीद नहीं लगाई थी कि रविवार को जो वो वोट डालने जा रहा है उससे राजनीतिक संकट दूर हो जाएगा. चुनाव में केवल एक ही प्रमुख दल मैदान में था प्रधानमंत्री टैकसिन चिनावाट की पार्टी थाई राक थाई. देश के तीनों प्रमुख विपक्षी दलों ने चुनाव का बहिष्कार किया हुआ था. विपक्षी दल थे ही नहीं, सो चुनाव में प्रधानमंत्री चिनावाट की पार्टी को 50 प्रतिशत से अधिक वोट मिले. प्रधानमंत्री इसे जीत बता रहे हैं लेकिन विपक्ष का कहना है कि ये उनकी हार है क्योंकि जो लोग वोट डालने आए ही नहीं, वे चिनावाट का विरोध कर रहे थे. थाईलैंड का चुनाव कैसे होता है? थाईलैंड में संसद की 500 सीटें हैं और इन्हें दो हिस्सों में बाँटा जाता है. चार सौ सीटों पर सीधे मतदान होता है लेकिन जो बाक़ी की 100 सीटें हैं वे आनुपातिक प्रतिनिधित्व की व्यवस्था के तहत चुनी जाती हैं. इन 100 सीटों में से किसी पार्टी को तभी कोई सीट मिल सकेगी जब उसे पूरे देश में पड़े मतों का पाँच प्रतिशत वोट मिला हो. प्रधानमंत्री ने चुनाव क्यों कराया? प्रधानमंत्री चिनावाट ने थाईलैंड में समय से तीन साल पहले ही चुनाव बुला लिया. दरअसल प्रधानमंत्री पर भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण लगातार दबाव बना हुआ था और प्रदर्शनकारी उनके इस्तीफ़े की माँग कर रहे थे. भ्रष्टाचार के आरोपों का केंद्र था प्रधानमंत्री के परिवार का देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी शिन कॉर्प में अपने शेयर बेचने का फ़ैसला जिसके कारण उन्हें और अन्य लोगों को एक अरब 90 करोड़ डॉलर का लाभ हुआ. ऐसे में चिनावाट ने चुनाव कराकर ये साबित करने का प्रयास किया कि चाहे ये प्रदर्शन सारी दुनिया का ध्यान आकर्षित कर रहे हों लेकिन जो देश का बहुमत है वो उनके साथ खड़ा है. अब परिणाम तो आ गए लेकिन क़ानूनी या संवैधानिक समस्या क्या है? विपक्ष के बहिष्कार के कारण कई सीटें ऐसी थीं जहाँ चिनावाट की पार्टी थाई राक थाई के प्रत्याशी अकेले ही मैदान में बिगुल बजा रहे थे. अब थाई संविधान ये कहता है कि किसी सीट से निर्विरोध निर्वाचन के लिए ये आवश्यक है कि उस प्रत्याशी को वहाँ का कम-से-कम 20 प्रतिशत मत अवश्य मिले. लेकिन दक्षिणी थाईलैंड में प्रधानमंत्री चिनावाट का विरोध इतना अधिक था उनकी पार्टी के कई प्रत्याशियों को 20 प्रतिशत वोट नहीं मिल पाए. इस बार 39 सीटों पर कोई भी नहीं चुना जा सका और अब इन सीटों पर रविवार को दोबारा मतदान होगा. लेकिन कोई गारंटी नहीं है कि इसके बाद भी वहाँ उम्मीदवार चुना ही जा सकेगा. अब संविधान के तहत संसद का गठन हो इसके लिए सभी 500 सीटों का भरना आवश्यक है और संसद चुनाव होने के 30 दिन के भीतर गठित हो जानी चाहिए. लेकिन इसके पहले वहाँ के इतिहास में कभी ऐसा नहीं हुआ कि सीटें खाली रही हों और ऐसे में थाईलैंड की राजनीति पर छाई धुंध कैसे छँटेगी किसी को नहीं पता. | इससे जुड़ी ख़बरें चिनावाट ने पद छोड़ने का फ़ैसला किया05 अप्रैल, 2006 | पहला पन्ना शिनवात्रा ने जीत का दावा किया02 अप्रैल, 2006 | पहला पन्ना हिरासत में 80 थाई प्रदर्शनकारियों की मौत26 अक्तूबर, 2004 | पहला पन्ना 'भारत का अधिकारी तंत्र भी बदल रहा है'30 जुलाई, 2004 | कारोबार आतंकवाद के ख़िलाफ़ साझा मंच पर ज़ोर31 जुलाई, 2004 | कारोबार थाईलैंड में एक साथ तीन विस्फोट03 अप्रैल, 2005 | पहला पन्ना थाईलैंड में हिंसा, 107 की मौत28 अप्रैल, 2004 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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