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आतंकवाद के ख़िलाफ़ साझा मंच पर ज़ोर | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने आतंकवाद का सामना करने के लिए साझा मंच बनाया जाने पर ज़ोर दिया है. शनिवार को 'बिमस्टेक' देशों के शिखर सम्मेलन में मनमोहन सिंह ने कहा कि धार्मिक कट्टरपंथ से पैदा होने वाले ख़तरों से भी नेताओं को होशियार रहना चाहिए. भारत, बांग्लादेश, बर्मा, श्रीलंका, थाईलैंड, नेपाल और भूटान के इस संगठन की पहली बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने ये विचार व्यक्त किए. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा, "यदि आतंकवाद, अवैध हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी जैसे मसलों का सामना करने के लिए साझा मंच बनता है तो बिमस्टेक देशों का आपस में विश्वास बढ़ेगा." उनका कहना था, "आतंकवाद से हम सब को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जूझना है और यह ही आज की असलीयत है. ये युद्धक्षेत्र हमारे और क़रीब आता जा रहा है." प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा, "धार्मिक कट्टरपंथ से बढ़ती असहनशीलता समाज और लोगों को बाँट सकती है और यदि हम इसे नज़रअंदाज़ करते हैं तो ख़तरा मोल ले रहे हैं." प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का कहना था कि अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक माहौल में असुरक्षा बढ़ रही है जिससे सभी देशों का काम और पेचीदा हो गया है. उनका कहना था कि इन परिस्थितियों में संयुक्त परियोजनाओं को अंजाम देना मुश्किल है और आर्थिक विकास, शांति और स्थिरता की राह में बाधाओं को दूर करने के लिए सरकारों को एकजुट होना होगा. बांग्लादेश की प्रधानमंत्री ख़ालिदा ज़िया और नेपाल के प्रधानमंत्री शेर बहादुर देयुबा ने अपने भाषणों में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से सहमति जताई. |
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