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'भारत का अधिकारी तंत्र भी बदल रहा है' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि देश के अधिकारी तंत्र की मानसिकता बदल रही है. उनका कहना है कि भारतीय उद्योगपतियों, व्यापारियों, नवयुवकों और उपभोक्ताओं की बदलती मानसिकता से अधिकारियों में भी बदलाव आ रहा है. उन्होंने ये विचार थाईलैंड के अख़बार 'द नेशन' को दिए एक साक्षात्कार में व्यक्त किए हैं. वे वहाँ दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के संगठन 'बिमस्टेक' की पहली शिखर बैठक में भाग लेने के लिए गए हुए हैं. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का कहना था कि अफ़सरशाही के कारण उदारीकरण और आर्थिक सुधार प्रक्रिया में आ रही अड़चने अब काफ़ी हद तक दूर हुई हैं. उनका कहना था कि भारतीय अर्थव्यवस्था अब एशिया की उन अर्थव्यवस्थाओं में से एक है जिनका विकास बहुत तेज़ी से हो रहा है. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का कहना था कि वे चाहते हैं कि आर्थिक दृष्टि से सरकार और लोगों के बीच, सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बीच तालमेल और बढ़े. आर्थिक सुधारों की सफलता प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने द नेशन को बताया कि आर्थिक सुधारों की सफलता के लिए आर्थिक समृद्धि बहुत ज़रूरी है. उनका कहना था, "यदि आर्थिक दृष्टि से पिछड़े लोगों को आर्थिक विकास कार्यक्रम नज़रअंदाज़ करते हैं तो उन सुधारों का कोई मतलब नहीं है. यही हमारी सरकार के न्यूनतम साझा कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य है." उनका कहना था कि यदि वैश्वीकरण को सफल होना है तो उसे बराबरी को बढ़ावा देना होगा और अधिक से अधिक लोगों को इस प्रक्रिया का हिस्सा बनाना होगा. प्रधानमंत्री ने कहा कि 'बिमस्टेक' दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन के देशों के संगठन 'सार्क' और दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के संगठन 'आसियान' के बीच पुल का काम करेगा. थाईलैंड के साथ सहयोग के विषय में उनका कहना था कि भारत के साथ मुक्त व्यापार संधि से द्विपक्षीय व्यापार एक अरब डॉलर से अधिक हो गया है. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि भारत का अन्य एशियाई देशों के साथ सूचना तकनीक क्षेत्र में सहयोग जारी है. |
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