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चिनावाट ने पद छोड़ने का फ़ैसला किया | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
टकसिन चिनावाट ने थाईलैंड के प्रधानमंत्री का पद छोड़ने का फ़ैसला किया है. उन्होंने कहा है कि वह अपनी पार्टी के प्रमुख की कुर्सी भी छोड़ रहे हैं. चिनावाट ने प्रधानमंत्री का कार्यभार तात्कालिक तौर पर उपप्रधानमंत्री चिडचाई वनसतिदया को सौंप दिया है. उनकी पार्टी को तय करना है कि नई सरकार का नेतृत्व कौन करेगा. हालाँकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि मध्यावधि चुनाव के बाद सरकार का गठन कब तक संभव हो सकेगा. विपक्षी दलों ने उपचुनावों के बहिष्कार का फ़ैसला किया है. उल्लेखनीय है कि सुचारू रूप से काम करने वाली संसद के गठन के लिए ये उपचुनाव ज़रूरी हैं. चुनाव टकसिन चिनावाट पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए देश के विभिन्न शहरों में कई हफ़्तों से लोग विरोध प्रदर्शन करते रहे हैं. विरोधियों को पटखनी देने के उद्देश्य से ही उन्होंने अचानक मध्यावधि चुनाव कराने की घोषणा कर दी. तीन प्रमुख विपक्षी पार्टियों ने चुनाव का बहिष्कार किया. दो अप्रैल को हुए मतदान के बाद चिनावाट की पार्टी विजयी रही लेकिन विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला थमा नहीं. टकसिन चिनावाट ने सोमवार शाम पद छोड़ने की घोषणा करते हुए थाईलैंड के लोगों से बीती बातों को भुलाते हुए एकजुट होने की अपील की थी. बीबीसी के बैंकाक संवाददाता के अनुसार चिनावाट की घोषणा का मिलाजुला असर हुआ है. विरोधियों ने जहाँ ख़ुशी ज़ाहिर की है, वहीं उनके समर्थक निराश हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें शिनवात्रा ने जीत का दावा किया02 अप्रैल, 2006 | पहला पन्ना हिरासत में 80 थाई प्रदर्शनकारियों की मौत26 अक्तूबर, 2004 | पहला पन्ना 'भारत का अधिकारी तंत्र भी बदल रहा है'30 जुलाई, 2004 | कारोबार आतंकवाद के ख़िलाफ़ साझा मंच पर ज़ोर31 जुलाई, 2004 | कारोबार थाईलैंड में एक साथ तीन विस्फोट03 अप्रैल, 2005 | पहला पन्ना थाईलैंड में हिंसा, 107 की मौत28 अप्रैल, 2004 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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