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सेना ने कहा, तख़्तापलट एकजुटता के लिए | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
प्रधानमंत्री की अनुपस्थिति में तख़्तापलट करने के बाद थाई सेना ने अपनी पकड़ मज़बूत बनानी शुरु कर दी है. तख्तापलट करने वाले सेना के गुट के नेता ने टेलीविज़न पर दिए गए राष्ट्र के नाम संदेश में कहा है कि कई महीनों की राजनीतिक अस्थिरता के बाद देश की एकजुटता बनाए रखने के लिए ऐसा करना ज़रुरी था. उल्लेखनीय है कि मंगलवार की रात वहाँ सेना के एक गुट ने पूरे देश में मार्शल लॉ लागू कर दिया. इस बीच बैंकॉक की सड़को पर सेना के टैंक और बख़्तरबंद गाड़ियाँ नज़र आ रही हैं. सभी सरकारी इमारतों पर सैनिकों का कब्ज़ा दिखाई दे रहा है. इस बीच सैन्य अधिकारियों ने कहा है कि सेना प्रमुखों ने थाईलैंड नरेश भूमिबल अदुल्यदेज से मुलाकात कर मौजूदा राजनीतिक स्थिति पर विचार विमर्श किया है. सेना के प्रमुख बून्यारातग्लिन ने कहा है कि जितनी जल्दी संभव होगा जनता को सत्ता वापस कर दी जाएगी. इस बीच इस तख़्तापलट की दुनिया भर में व्यापक प्रतिक्रिया हुई है. प्रधानमंत्री टकसिन चिनावाट इस समय न्यूयॉर्क में हैं. उन्होंने देश में आपात स्थिति लगाने की घोषणा की है. हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि उनके आदेशों का पालन अब थाईलैंड में किस तरह होगा और वे कब तक वापस लौट पाएँगे. मतभेद तख़्तापलट करने वाले सैनिक गुट के एक प्रवक्ता ने कहा कि चिनवाट और उनके विरोधियों के बीच गंभीर मतभेद पैदा हो गए थे जिससे सेना इस तरह की कार्रवाई करने पर मजबूर हुई. प्रवक्ता ने बताया कि सेना अभी राजा अदुल्यदेज की निगरानी में काम कर रही है. सैनिकों ने बैंकॉक में सरकारी दफ़्तरों, टेलीविज़न केंद्रों और महत्वपूर्ण सामरिक केंद्रों पर नियंत्रण कर लिया है. टेलीविज़न पर अपने बयान में सेना के इस गुट ने कहा है कि उन्होंने 'रिफ़ॉर्म ग्रुप फ़ॉर डेमोक्रेसी' का गठन किया है और वे राजा के प्रति वफ़ादार हैं. समाचार एजेंसी एपी के अनुसार सेना ने थाईलैंड के शेयर बाज़ार, बैंक और स्कूल-कॉलेज को बंद रखने की घोषणा की है. मंत्रालयों के सचिवों सहित सभी नौकरशाहों और यूनिवर्सिटी के प्रमुख़ों सहित सभी सरकारी विभागों के प्रमुख़ों से कहा गया है कि वे 'रिफ़ॉर्म ग्रुप फ़ॉर डेमोक्रेसी' के प्रति जवाबदेह रहें. घोषणा दूसरी ओर संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक में हिस्सा लेने न्यूयॉर्क गए प्रधानमंत्री चिनावाट ने गड़बड़ी की ख़बरों के बाद देश में आपात स्थिति की घोषणा तो कर दी लेकिन वे आपातकाल को लागू कराने की स्थिति में नहीं दिख रहे हैं. न्यूयॉर्क से थाई टेलीविज़न पर दिए अपने संदेश में प्रधानमंत्री टकसिन चिनावाट ने सेना प्रमुख को पद से हटाकर सरकारी दफ़्तर में रिपोर्ट करने को कहा है. प्रतिक्रिया थाईलैंड में हुए इस सैन्य विद्रोह और तख़्तापलट की दुनिया भर में व्यापक प्रतिक्रिया हुई है और इस पर चिंता ज़ाहिर की गई है.
थाईलैंड के पड़ोसी मलेशिया ने, जो इस समय आसियान देशों का मुखिया भी है, कहा है कि वहाँ जितनी जल्दी हो सके, लोकतंत्र की बहाली करनी चाहिए. अमरीकी विदेश विभाग ने कहा है कि वह स्थिति पर नज़र रखे हुए है लेकिन अभी इस पर कुछ कहना जल्दबाज़ी होगी. ऑस्ट्रेलिया ने इस तख़्तापलट पर खेद जताया है. न्यूज़ीलैंड की प्रधानमंत्री हेलेन क्लार्क ने ग़ैर-प्रजातांत्रिक ढंग से सरकार को हटाए जाने की निंदा की है. जबकि यूरोपीय संघ ने कहा है कि जितनी जल्दी हो सके, थाईलैंड में लोकतंत्र की बहाली होनी चाहिए. संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान ने कहा है कि वे लोकतांत्रिक ढंग से सरकार बदले जाने के पक्ष में हैं न कि बंदूक की नोक पर. |
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