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इसराइल-लेबनान संघर्ष से मानवीय संकट | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इसराइली सेना ने हवाई हमलों के बाद अब ज़मीनी कार्रवाई शुरू करते हुए बुधवार को दक्षिणी लेबनान के एक क्षेत्र में प्रवेश किया, वैसे सेना का कहना था कि ये सीमित तौर पर की गई कार्रवाई थी. उधर इसराइल के हाइफ़ा शहर में हिज़बुल्ला ने एक और हमला किया है. इसराइली सैनिकों और हिज़बुल्ला के लड़ाकों के बीच भारी लड़ाई होने की ख़बरें हैं. इसराइली सेना के हमले, हिज़बुल्ला के गढ़ समझे जाने वाले दक्षिणी लेबनान तक ही सीमित नहीं, बल्कि दक्षिणी बेरूत और देश के पूर्वी इलाक़े भी उसकी व्यापक कार्रवाई में शामिल हैं. हिज़बुल्ला की तरफ़ से भी इसराइल पर रॉकेट दाग़े जा रहे हैं. आज कोई छह रॉकेट इसराइल के तीसरे सबसे बड़े शहर हाइफ़ा पर आकर गिरे. लेकिन इसराइली सेना की एक प्रवक्ता कैप्टन नोआ मेअर का कहना है कि इसराइली हमलों से हिज़बुल्ला को भारी नुक़सान हो रहा है. हमने हिज़बुल्ला को काफ़ी नुक़सान पहुंचाया है हालांकि अब भी वो हमले कर पा रहे हैं. लेकिन हमने उनके रॉकेटों के भंडार को कम कर दिया है और हथियारों की सप्लाई का रास्ता काट दिया है जिसकी वजह से उनके नेता अज्ञातवास में चले गए हैं. दूसरी तरफ़ इसराइली बम्बारी के कारण हज़ारों लोग सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं. बहुत से लोग पहाड़ियों पर चले गए हैं. बहुत से सड़क के रास्ते सीरिया जा रहे हैं और बहुतों ने स्कूलों और मस्जिदों में शरण ली है. कुछ की समझ में नहीं आ रहा कि क्या करें. उन्हीं में से एक हैं सोहा जो अपने पति और बच्चे के साथ बेरुत के केन्द्रीय इलाक़े में रहती हैं. सोहा कहती हैं, "मैंने अपना सामान बाँध कर तैयार कर रखा है क्योंकि न मालूम कब हमें भागना पड़े. लेकिन भागने से पहले खाना पानी भी तो लेना होगा न, क्योंकि मेरा बच्चा अभी छोटा है." लेकिन बेरूत के सभी इलाक़ों पर हमले नहीं हुए हैं. मोहम्मद नसूली टैस्सी चलाते हैं. उनका कहना है कि राजधानी के कई हिस्सों में जनजीवन सामान्य चल रहा है, "कुछ ख़ास इलाक़ों में बमबारी हुई है जैसे शहर के दक्षिणी हिस्से में जहां हिज़बुल्ला के ठिकाने हैं. लेकिन दूसरे हिस्सों में बिल्कुल गोलीबारी नहीं हुई. हां इमारतों के ऊपर से जब इसराइली लड़ाकू विमानों के चक्कर लगाने की आवाज़ें सुनाई देती हैं तो बहुत डर लगता है. "ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, स्विट्ज़रलैंड और अमरीका के बहुत से नागरिकों को लेबनान से निकाल लिया गया है और विदेशों में रहने वाले उन लेबनानियों को भी, जो गर्मियों की छुट्टियों में अपने रिश्तेदारों से मिलने आते हैं." विस्थापन राहत एजेंसियों का कहना है कि इसराइली हमलों की वजह से कोई पाँच लाख लोग विस्थापित हुए हैं. सबसे बड़ी समस्या उन लोगों तक पहुंचने की है जो देश के दक्षिणी भाग में रहते हैं क्योंकि वहां हमले सबसे ज़्यादा हो रहे हैं.
संयुक्त राष्ट्र की बाल कल्याण संस्था यूनिसैफ़ के टॉमस डेविन का कहना है कि इन लोगों के लिए पानी और शौचालयों की व्यवस्था करना उनकी प्राथमिकता है. टॉमस डेविन ने कहा, "जिन स्कूलों में लोगों ने शरण ले रखी है वहां की हालत काफ़ी ख़राब है. जो स्कूल दो सौ बच्चों के लिए बने हैं वहां सात सौ से आठ सौ लोग रह रहे हैं. न वहां पर्याप्त पानी है, न शौच और नहाने की व्यवस्था है. खाना पकाने की व्यवस्था तो है ही नहीं. कुछ ही दिनों में साफ़-सफ़ाई एक बड़ी समस्या बन जाएगी." उधर विदेशी जहाज़ लबनान के बंदरगाह से अपने हज़ारों नागरिकों को निकाल कर ले जा रहे हैं. भारतीय भारत ने भी अपने नागरिकों को निकालने की व्यवस्था की है. लेकिन कोई 13 हज़ार भारतीयों में से चार पाँच हज़ार ऐसे हैं जो ग़ैर क़ानूनी ढंग से लेबनान में काम कर रहे हैं और उनमें से बहुत से पंजाब के हैं. उनके लिए निकलना संभव नहीं. लेकिन लेबनान की गुरुद्वारा प्रबंधक समिति के प्रधान सरदार स्वर्ण सिंह कहते हैं कि वो जब चाहें गुरुद्वारे आ सकते हैं, "ब्रिटेन का एक युद्धपोत अपने 200 नागरिकों को लेकर साइप्रस पहुंच गया है." रबी अल फ़ादेल लंदन के रहने वाले हैं उन्होंने जब अपने बारह वर्षीय पुत्र को जहाज़ से उतरते देखा तो बहुत राहत महसूस की, सच कहूं तो उसे देखकर बड़ी राहत मिली. मैं बहुत ख़ुश हूं. मैं बता नहीं सकता मैं कितना ख़ुश हूं. मैं उन लोगों के डर का अंदाज़ा लगा सकता हूं जिनके अपने अब भी वहां फंसे हुए हैं. लेकिन कम से कम मेरा बेटा तो सुरक्षित है. येरुशलम में बीबीसी के एक संवाददाता ने संयुक्त राष्ट्र के एक राजनयिक से बात की जिनका कहना था कि इसराइल का मुख्य उद्देश्य है हिज़बुल्ला को नष्ट करना और इसमें कई सप्ताह का समय लग सकता है. लेकिन पिछले एक हफ़्ते में 200 से ज़्यादा आम नागरिक मारे जा चुके हैं जबकि इसराइल में मरने वालों की संख्या 25 हो गई है. |
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