BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
गुरुवार, 06 जुलाई, 2006 को 17:48 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
हम तो बच गए मगर...

धमाकों की शिकार बस
सात जुलाई का दिन एक सामान्य दिन की तरह ही शुरु हुआ.

मुझे शाम को अपने काम के लिए बुश हाउस जाना था जहाँ बीबीसी वर्ल्ड सर्विस का मुख्यालय है.

सोचा कुछ बाज़ार के काम ही निपटा लूं.

जब लौटी तो टेलिफ़ोन की आंसरिंग मशीन की लाल बत्ती चमक रही थी.

बटन दबाया तो अपनी एक मित्र के कई संदेश मिले. उनका आग्रह था कि मैं तुरंत उन्हें फो़न करूं.

मैंने उनका नंबर मिलाया तो बोलीं ‘तुमने समाचार सुना’. मैंने पूछा ‘कैसा समाचार’. ‘अरे भई लंदन अंडरग्राउंड में बम धमाके हुए है, पिकेडिली लाइन पर. मैंने सोचा तुम कहीं बीबीसी के लिए तो नहीं निकल गईं’.

मैं सकते में आ गई. सबसे पहले ध्यान गया अपनी बेटी की ओर.

उसे फ़ोन किया तो नंबर मिलकर ही नहीं दिया. कई कोशिशों के बाद संपर्क हुआ तो राहत मिली.

टेलिविज़न पर बराबर ख़बरें आ रही थीं.

लंदन के बम धमाकों की ख़बर दुनिया भर में आग की तरह फैली और फिर आने शुरु हुए परिवार वालों के फ़ोन.

हम तो बच गए, लेकिन और 52 लोग उतने भाग्यशाली नहीं थे.

इससे जुड़ी ख़बरें
लंदनः कब क्या हुआ
22 जुलाई, 2005 | पहला पन्ना
हमलावरों की ज़ोर-शोर से तलाश
22 जुलाई, 2005 | पहला पन्ना
इंटरनेट लिंक्स
बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>