|
हम तो बच गए मगर... | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
सात जुलाई का दिन एक सामान्य दिन की तरह ही शुरु हुआ. मुझे शाम को अपने काम के लिए बुश हाउस जाना था जहाँ बीबीसी वर्ल्ड सर्विस का मुख्यालय है. सोचा कुछ बाज़ार के काम ही निपटा लूं. जब लौटी तो टेलिफ़ोन की आंसरिंग मशीन की लाल बत्ती चमक रही थी. बटन दबाया तो अपनी एक मित्र के कई संदेश मिले. उनका आग्रह था कि मैं तुरंत उन्हें फो़न करूं. मैंने उनका नंबर मिलाया तो बोलीं ‘तुमने समाचार सुना’. मैंने पूछा ‘कैसा समाचार’. ‘अरे भई लंदन अंडरग्राउंड में बम धमाके हुए है, पिकेडिली लाइन पर. मैंने सोचा तुम कहीं बीबीसी के लिए तो नहीं निकल गईं’. मैं सकते में आ गई. सबसे पहले ध्यान गया अपनी बेटी की ओर. उसे फ़ोन किया तो नंबर मिलकर ही नहीं दिया. कई कोशिशों के बाद संपर्क हुआ तो राहत मिली. टेलिविज़न पर बराबर ख़बरें आ रही थीं. लंदन के बम धमाकों की ख़बर दुनिया भर में आग की तरह फैली और फिर आने शुरु हुए परिवार वालों के फ़ोन. हम तो बच गए, लेकिन और 52 लोग उतने भाग्यशाली नहीं थे. | इससे जुड़ी ख़बरें सात जुलाई से सबक लें-मुस्लिम सांसद05 जुलाई, 2006 | पहला पन्ना 'हमलों के मुद्दे पर बंटे हैं ब्रितानी मुस्लिम'04 जुलाई, 2006 | पहला पन्ना क्या है सच्चाई पाकिस्तानी मदरसों की?05 जुलाई, 2006 | पहला पन्ना मुस्लिम समुदाय में असुरक्षा की भावना08 जुलाई, 2005 | पहला पन्ना ब्रितानी मुसलमानों में चिंता की लहर13 जुलाई, 2005 | पहला पन्ना लंदनः कब क्या हुआ22 जुलाई, 2005 | पहला पन्ना हमलावरों की ज़ोर-शोर से तलाश22 जुलाई, 2005 | पहला पन्ना ब्रितानी पुलिस नीति नहीं बदलेगी25 जुलाई, 2005 | पहला पन्ना इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||