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ब्रितानी मुसलमानों में चिंता की लहर | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ब्रिटेन में मुस्लिम समुदाय में इस ख़बर पर चिंता की लहर दौड़ गई है कि लंदन में हुए धमाकों के पीछे मुस्लिम समुदाय के ही कुछ ऐसे लोगों का हाथ हो सकता है जो ब्रिटेन में ही पैदा हुए और ब्रितानी नागरिक थे. ब्रिटेन की मुस्लिम काउंसिल जनरल सैक्रेटरी सर इक़बाल लकरानी ने कहा कि इस ख़बर पर 'चिंता, सदमा और डर' के साथ प्रतिक्रिया हुई है. पिछले सप्ताह लंदन में हुए धमाकों की जाँच कर रही मेट्रोपोलिटन पुलिस की आतंकवाद निरोधक इकाई ने चार संदिग्ध हमलावरों की पहचान करने का दावा करते हुए कहा है कि चारों संदिग्ध हमलावर ब्रितानी नागरिक हैं और इनमें से तीन पाकिस्तानी मूल के हैं. सर इक़बाल सकरानी ने कहा, "इस्लाम में कुछ भी नहीं है जो बम हमलावरों की बुरी गतिविधियों को जायज़ ठहरा सके." उन्होंने कहा जिन अपराधियों ने लंदन में बम धमाके किए उन्हें इस्लाम मज़हब से दूर रखने की ज़रूरत है. "वे मुस्लिम थे और ऐसा नहीं है कि समस्या इस्लाम है, समस्या वे लोग हैं, इस तरह के हमलों के पीछे अपराधिक मानसिकता है." सर इक़बाल सकरानी ने यह बयान पुलिस की उस सूचना के बाद दिया जिसमें कहा गया था कि पुलिस को विश्वास है कि जिन चार लोगों ने हमले किए उनमें से तीन वेस्ट योर्कशर से थे और बम धमाकों में ही उनकी मौत हो गई. इस्लामी मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष मसूद शदजारेह ने कहा, "किसी के भी अपराध को उसकी राष्ट्रीयता, धर्म या उसके मूल के साथ जोड़ना चाहिए." "इस तरह से संबंध बिठाना बिल्कुल ग़लत है और इससे दुर्भावना भड़क सकती है जिससे और अन्याय हो सकता है और ऐसे में निर्दोष लोगों के ख़िलाफ़ हिंसा भड़कने का डर होता है. एक अपराधी सिर्फ़ अपराधी होता है, बस." मुस्लिम काउंसिल ने कहा है कि वह लंदन में हुए धमाकों के विरोध में एक राष्ट्रीय बहुधर्म प्रदर्शन करने की योजना बना रही है. सर इक़बाल सकरानी ने कहा, "हम अन्य समुदायों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे हैं. यह बहुत महत्वपूर्ण है कि हमारा मिशन तभी कामयाब होगा जब हम सब साथ मिलकर काम काम करेंगे." |
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