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सात जुलाई से सबक लें-मुस्लिम सांसद | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
लंदन की परिवहन व्यवस्था पर सात जुलाई 2005 को हुए धमाकों के सिलसिले में मंत्रियों को लेबर पार्टी के एक मुस्लिम सांसद की आलोचना का सामना करना पड़ रहा है. लंदन के टूटिंग इलाक़े से लेबर पार्टी के सांसद सादिक ख़ान ने कहा है कि वह इस पर निराश हैं कि ब्रिटेन में मुस्लिम समुदाय को साथ लेकर चलने के लिए पर्याप्त उपाय नहीं किए गए हैं. सादिक ख़ान ने सात जुलाई के धमाकों की पहली वर्षगाँठ के मौक़े पर ये विचार व्यक्त किए हैं. सादिक ख़ान का कहना है कि धमाकों के बाद जो विशेष कार्यबल का गठन किया गया था उसकी कामयाबियों के बारे में फ़िज़ा में एक निराशा नज़र आ रही है. लेकिन स्थानीय सरकार विभाग के मंत्री फिल वूलास का कहना है कि इस दिशा में अच्छा काम हो रहा है. ग़ौरतलब है कि धमाकों के बाद सरकार ने सात मुस्लिम कार्यदल गठित किए गए थे जिन्होंने नवंबर 2005 में अपनी रिपोर्टें दे दी थीं. लेकिन सादिक ख़ान का कहना है कि उन कार्यदलों की सिफ़ारिशों में से सिर्फ़ तीन पर अमल किया गया है.
मंगलवार को फ़ैबियन सोसायटी के एक सम्मेलन में सादिक ख़ान ने कहा, "सभी अच्छे विचारों का क्या हुआ? समय सीमा निर्धारित करते हुए कोई ठोस कार्य योजना क्यों तैयार नहीं की गई है?" "बहुत कम प्रगति हुई है और हवा वातावरण में निराशा का माहौल है. सिर्फ़ तीन सिफ़ारिशों पर अमल किया गया है और कार्यदलों के सदस्य महसूस कर रहे हैं कि उनकी बात ठीक तरह से नहीं सुनी गई है." सादिक ख़ान ने कहा, "मेरी चिंता है कि सरकार प्रतिभाशाली मुस्लिम युवकों के साथ बातचीत और विचार विमर्श करने जैसी भावना देकर उच्च दर्जा दे रही है लेकिन फिर उन पर अमल नहीं करके उन्हें उस ऊँचे दर्जे से नीचे भी उतार रही है क्योंकि बहुत छोटा सा परिवर्तन नज़र आ रहा है." उधर ब्रिटेन के गृहमंत्रालय के एक प्रवक्ता फ़िल वूलाज़ ने कहा कि प्रीवेंशन एक्सट्रीमिज़्म टुगैदर (पीईटी) यानी अतिवाद के ख़िलाफ़ एकजुटता नामक कार्यदल के सदस्यों की अंतिम रिपोर्ट के बाद से काफ़ी कुछ किया गया है. वूलाज़ ने कहा कि यह एक सतत प्रक्रिया है और ऐसा नहीं है कि यह सिर्फ़ एक झटके में लागू कर दी जाए. यह एक बहुत बड़ा काम है और इस काम में हमारे सबसे बड़ा सहयोगी समुदाय मुस्लिम हैं." फ़िल वूलाज़ ने कहा, "एक सरकार के तौर पर हम मुस्लिम समुदाय से यह नहीं कह सकते कि वे क्या करें और क्या नहीं करें. हमें उनके और सांसदों के साथ मिलकर काम करना है और सादिक ख़ान भी उनमें से एक हैं." उन्होंने कहा कि कुल 64 सिफ़ारिशें थीं जिनमें से सिर्फ़ 27 सरकार के लिए थीं, बाक़ी समुदायों और सहयोगियों के लिए थीं. | इससे जुड़ी ख़बरें 'हमलों के मामले में बंटे हैं ब्रितानी मुस्लिम'04 जुलाई, 2006 | पहला पन्ना क्या है सच्चाई पाकिस्तानी मदरसों की?05 जुलाई, 2006 | पहला पन्ना मुस्लिम समुदाय में असुरक्षा की भावना08 जुलाई, 2005 | पहला पन्ना ब्रितानी मुसलमानों में चिंता की लहर13 जुलाई, 2005 | पहला पन्ना लंदनः कब क्या हुआ22 जुलाई, 2005 | पहला पन्ना हमलावरों की ज़ोर-शोर से तलाश22 जुलाई, 2005 | पहला पन्ना ब्रितानी पुलिस नीति नहीं बदलेगी25 जुलाई, 2005 | पहला पन्ना इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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