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बुधवार, 05 जुलाई, 2006 को 14:05 GMT तक के समाचार
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क्या है सच्चाई पाकिस्तानी मदरसों की?

मदरसा
मदरसों को लेकर तरह-तरह के शक ज़ाहिर किए गए
पाकिस्तानी मदरसों की भूमिका काफ़ी अरसे से चिंता का विषय रही है. विगत में कुछ मदरसों ने ऐसे लोग पैदा किए हैं जिन्होंने कट्टरपंथी इस्लामी आंदोलनों में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया.

सात जुलाई के बम हमलों के बाद अंतरराष्ट्रीय दबाव ने राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ को बाध्य किया कि वे ऐसे लोगों को क़ाबू में रखने के प्रयास करें.

पाकिस्तान में धार्मिक मामलों के मंत्री एजाज़ उल हक़ का कहना है कि इन मदरसों का सरकारी तौर पर पंजीकरण होना ज़रूरी है.

वह कहते हैं, "उन्हें ज़िम्मेदारी लेनी होगी कि वहाँ कोई जातिवाद नहीं होगा, नफ़रत फैलाने वाली सामग्री का प्रकाशन नहीं होगा और चरमपंथी गतिविधियों में हिस्सा नहीं लिया जाएगा".

 उन्हें ज़िम्मेदारी लेनी होगी कि वहाँ कोई जातिवाद नहीं होगा, नफ़रत फैलाने वाली सामग्री का प्रकाशन नहीं होगा और चरमपंथी गतिविधियों में हिस्सा नहीं लिया जाएगा
एजाज़ उल हक़

कट्टरपंथी मदरसों में अन्य धर्मों के प्रति असहिष्णुता सिखाई जाती है जो कभी-कभी हिंसा का रूप ले लेती है.

कुछ पर्यवेक्षक इस बात को लेकर संशय में हैं कि यह सुधार कितने असरदार हैं.

कोई सुबूत नहीं मिला

लेकिन यह भी सच है कि इस बात का कोई सुबूत नहीं है कि लंदन बम हमलावरों में से किसी ने वहाँ के इस्लामी मदरसों में तालीम पाई थी.

सरकार ने पिछली जुलाई से मदरसों में नए छात्रों के आने पर पाबंदी लगा दी है और उसके बाद से वहाँ पढ़ने वाले विदेशी छात्रों की तादाद में नाटकीय रूप से कमी आई है.

जो इस समय वहाँ पढ़ रहे हैं उनका कहना है कि सरकार का फ़ैसला अनुचित है.

 मुशर्रफ़ क्यों दख़लंदाज़ी करके कह रहे हैं कि तुम यह नहीं कर सकते और वह नहीं कर सकते. अगर वह स्वंय मुसलमान होने का दावा करते हैं तो अपने ही लोगों को मज़हब की तालीम पाने से क्यों रोकने की कोशिश कर रहे हैं
मदरसे का छात्र

एक छात्र का कहना है, "मुशर्रफ़ क्यों दख़लंदाज़ी करके कह रहे हैं कि तुम यह नहीं कर सकते और वह नहीं कर सकते. अगर वह स्वंय मुसलमान होने का दावा करते हैं तो अपने ही लोगों को मज़हब की तालीम पाने से क्यों रोकने की कोशिश कर रहे हैं".

"यह पूरी तरह ग़लत है. क्या बुश ऐसा करते हैं? क्या टोनी ब्लेयर ने यह किया? यह बहुत ही मूर्खतापूर्ण है. यह ऐसा कहने के बराबर है कि अपनी मज़हब छोड़ो दो और घर लौट जाओ".

एक अन्य छात्र का कहना था, "मुझे नहीं लगता मदरसा किसी व्यक्ति को उससे बुरा कैसे बना देगा जैसा वह था. वह तो लोगों को बेहतर ही बनाता है. मेरे कहने का मतलब यह है कि इन लोगों में कट्टरपंथ और आतंकवाद की भावनाएँ और कही से आई होंगी. ये लोग इंसान नहीं हैं".

 इस्लाम लोगों को सिखाता है कि ज़ुल्म और किसी का क़ब्ज़ा बर्दाश्त मत करो. लेकिन छात्रों को यह मदरसे में सीखने की ज़रूरत नहीं है. यह सब वे टेलीविज़न और रेडियो पर समाचार देख-सुन कर सीखते हैं
मौलाना समीउल हक़

बहुत से लोगों के लिए समस्या मदरसा नहीं है. उनका कहना है कि इराक़, अफ़ग़ानस्तान और फ़लस्तीनी इलाक़ों में अगर लोग कट्टरपंथ की ओर बढ़े हैं तो उसका कारण ब्रितानी और अमरीकी विदेश नीतियाँ हैं.

मौलाना समीउल हक़ एक प्रमुख मदरसे के निदेशक हैं.

उनका कहना है, "इस्लाम लोगों को सिखाता है कि ज़ुल्म और किसी का क़ब्ज़ा बर्दाश्त मत करो. लेकिन छात्रों को यह मदरसे में सीखने की ज़रूरत नहीं है. यह सब वे टेलीविज़न और रेडियो पर समाचार देख-सुन कर सीखते हैं".

पूरी दुनिया महाशक्तियों के दोहरे मापदंड दिखाने वाली एक खुली किताब है.

सभी पाकिस्तानी मदरसे पूरी तरह इस्लामी शिक्षा का केंद्र भर ही नहीं है. कुछ जातिवादी घृणा को भी बढ़ावा देते हैं.

लेकिन वे अंतरराष्ट्रीय चरमपंथी पैदा करने की फ़ैक्टरी भी नहीं हैं. उनमें से अधिकतर धार्मिक स्कूल हैं जिनकी भूमिका को लेकर पश्चिम और पूर्व की अलग-अलग अवधारणाएँ हैं.

जैसे और बातों को लेकर भी हैं.

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