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हमलावरों की ज़ोर-शोर से तलाश | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ब्रिटेन में पुलिस ने उन लोगों की तलाश तेज़ कर दी है जिन्होंने लंदन की परिवहन व्यवस्था को बम हमले का निशाना बनाने की कोशिश की. गुरुवार को लंदन में तीन भूमिगत रेलों और एक बस में छोटे धमाके हुए. इन धमाकों के कारण लंदन की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था बुरी तरह अस्त-व्यस्त हो गई. धमाकों में किसी के गंभीर रूप से घायल होने की ख़बर नहीं है, लेकिन लंदन के पुलिस प्रमुख सर इयन ब्लेयर ने कहा है कि हमलावरों का इरादा लोगों की जान लेने का था. पुलिस के अनुसार कंधे पर लटकाने वाले बैगों या रकसैक में रखे गए विस्फोटकों में सही ढंग से धमाका नहीं हो पाने के कारण सात जुलाई के स्तर पर जानमाल का नुकसान नहीं हुआ. उल्लेखनीय है कि सात जुलाई को लंदन की परिवहन व्यवस्था को निशाना कर किए गए चार आत्मघाती हमलों में 56 लोग मारे गए थे, जबकि सैंकड़ो अन्य घायल हो गए थे. समानताएँ अभी ब्रितानी सुरक्षा बल उन हमलों के तार जोड़ने के प्रयास में जुटे हुए थे कि 20 जुलाई को फिर से चरमपंथियों ने लंदन को निशाना बनाया.
बीबीसी के सुरक्षा संवाददाता के अनुसार सात जुलाई और 20 जुलाई के हमलों में काफ़ी कुछ समानताएँ हैं. इस बार भी चारों धमाके लगभग एक ही साथ हुए हैं, हालाँकि बम ठीक से नहीं फटे. पुलिस का मानना है कि ताज़ा हमलों से जुड़े जो सबूत उपलब्ध हैं उनके ज़रिए हमलावरों तक पहुँचा जा सकेगा. माना जाता है कि पुलिस ताज़ा हमलों में शामिल हमलावरों का हुलिया तैयार करने में सफल रही है. प्रत्यक्षदर्शियों ने नाकाम धमाकों के बाद मची अफ़रा-तफ़री में संदिग्ध हमलावरों के भागने की बात की है. ब्रितानी प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने लोगों से कहा है कि वे चरमपंथी कार्रवाइयों से आतंकित हुए बिना अपने कामकाज़ में लगे रहें. अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश और फ़्रांसीसी राष्ट्रपति ज्याक़ शिराक समेत दुनिया भर के अनेक नेताओं ने लंदन में हुए ताज़ा हमले की निंदा करते हुए आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई है. हमले के दिन लंदन में मौजूद ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री जॉन हॉवर्ड ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद से मुक़ाबले में उनका देश ब्रिटेन के साथ है. |
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