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'हमलों के मुद्दे पर बंटे हैं ब्रितानी मुस्लिम' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ब्रिटेन के एक प्रमुख अख़बार टाइम्स में छपे सर्वेक्षण के अनुसार यहाँ बसे मुसलमानों में से 13 प्रतिशत ऐसे हैं जो पिछले साल लंदन में हुए बम धमाकों के हमलावरों को शहीद मानते हैं. सर्वेक्षण के अनुसार छह व्यक्तियों में से एक ने हमलों को तो सही नहीं ठहराया लेकिन उनके कारण को सही माना. पचास में से एक व्यक्ति ने कहा है कि अगर उनके परिवार का कोई सदस्य अल क़ायदा में शामिल होता है तो वे गर्व अनुभव करेंगे. वहीं सात प्रतिशत लोगों ने यह माना कि किन्हीं परिस्थितियों में आत्मघाती बम हमले सही हो सकते हैं. इस सर्वेक्षण पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए ब्रिटेन के प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने कहा, "ज़्यादातर मुसलमान चरमपंथ से घृणा करते हैं, वे पूरी तरह से कट्टरता के ख़िलाफ़ हैं और बाक़ी लोगों की तरह ही चाहते हैं कि उसकी हार हो. " कार्यदलों का गठन पिछले साल हुए लंदन हमलों के बाद ब्रिटेन सरकार ने सात मुस्लिम कार्यदलों का गठन किया था ताकि वे चरमपंथ से निपटने के उपाय सुझा सकें. लेकिन अब एक प्रमुख ब्रितानी मुस्लिम सांसद सादिक़ ख़ान का कहना है कि इन कार्यदलों के सदस्य इस बात से निराश हुए हैं कि उनकी बहुत कम सिफ़ारिशों पर अमल किया गया है. सादिक़ ख़ान ने कहा, "सदस्यों ने मुझसे पूछा कि हमारी मेहनत का क्या हुआ. मेरा कहना है कि जब आप हमारी बिरादरी के सबसे ज़्यादा अलग-थलग हुए सदस्यों से सम्पर्क करते हैं और फिर उनके साथ सलाह नहीं करते, तो उन्हें लगता है कि यह सब वक़्त की बर्बादी थी." लेकिन ब्रितानी प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर की सरकार इस आलोचना का खंडन कर रही है. मंत्रियों का कहना है कि कार्यदलों की 27 सिफ़ारिशों में से सरकार ने दो ठुकरा दी थीं और दो स्पष्ट नहीं थीं लेकिन बाक़ी को लागू किया जा रहा है. सरकार का तर्क पिछले साल 7 जुलाई को लंदन में हुए आत्मघाती हमले में हमलावरों समेत 56 लोग मारे गए थे. बीबीसी संवादाता का कहना है कि जब ये रहस्य खुला कि हमलावर ब्रिटेन में ही पैदा हुए युवा थे तो ब्रिटेनवासियों को काफ़ी झटका लगा था. लेकिन मुस्लिम सांसद सादिक़ ख़ान इस बात से नाराज़ हैं कि इन हमलों की सार्वजनिक जाँच नहीं कराई गई है. ब्रिटेन सरकार का तर्क है कि जाँच से सुरक्षा सेवाओं का ध्यान बटेगा. प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने मंगलवार को वरिष्ठ सांसदों की एक समिति से कहा है कि सब कुछ सरकार नहीं कर सकती और उदारवादी मुसलमानों को उन विचारों से निपटने के लिए और अधिक प्रयास करने चाहिए जो चरमपंथियों का क्रोध भड़कते हैं. टोनी ब्लेयर ने कहा," सबसे पहले तो हमें पश्चिम के ख़िलाफ़ जो मुसलमानों की बिल्कुल ग़लत शिकायत है उसे हराना है. यह काम सरकार तो करेगी ही लेकिन इसके लिए उदारवादी मुसलमानों को एक जुट करने की ज़रूरत है, जिससे वो अपनी बिरादरी में जाकर उनके विचारों को, पश्चिमी के ख़िलाफ़ उनकी शिकायतों को और उनकी विचारधारा की बुनियाद को समझें." बीबीसी संवाददाता का कहना है कि लंदन धमाकों को एक साल पूरा होने को आया है लेकिन ब्रिटेन की सरकार और मुस्लिम समुदाय के बीच की दूरी कम होती दिखाई नहीं दे रही. | इससे जुड़ी ख़बरें लंदन छापे पर सवाल उठे10 जून, 2006 | पहला पन्ना लंदन रिपोर्ट में विफलताओं का उल्लेख05 जून, 2006 | पहला पन्ना लंदन में छापा, एक को गोली लगी02 जून, 2006 | पहला पन्ना मेनेज़ेज़ के परिवार ने नाराज़गी जताई20 जनवरी, 2006 | पहला पन्ना ब्रिटेन में नए सुरक्षा नियमों की घोषणा24 अगस्त, 2005 | पहला पन्ना 'मौलवियों पर देशद्रोह की कार्रवाई संभव'07 अगस्त, 2005 | पहला पन्ना 'मुसलमानों के ख़िलाफ़ घटनाएँ बढ़ीं'03 अगस्त, 2005 | पहला पन्ना 'हिजाब छोड़ा जा सकता है'04 अगस्त, 2005 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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