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गुरुवार, 04 अगस्त, 2005 को 00:00 GMT तक के समाचार
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'हिजाब छोड़ा जा सकता है'
डॉक्टर ज़की बदावी
डॉक्टर ज़की बदावी को प्रगतिशील इस्लामी विद्वान माना जाता है
ब्रिटेन में एक प्रमुख इस्लामी विद्वान डॉक्टर ज़की बदावी ने मुस्लिम औरतों को सुझाव दिया है कि वे जातीय नफ़रत की घटनाओं में बढ़ोत्तरी को देखते हुए हिजाब और बुर्क़ा पहनना बंद कर दें.

लंदन के मुस्लिम कॉलेज के प्रमुख डॉक्टर ज़की बदावी मस्जिदों और इमामों की परिषद के चेयरमैन भी हैं.

डॉक्टर बदावी ने कहा, "हिजाब पहनने वाली औरत को कुछ ग़ैरज़िम्मेदार तत्वों से बदतमीज़ी का सामना करना पड़ सकता है."

ग़ौरतलब है कि लंदन पुलिस ने मंगलवार को कहा था कि सात जुलाई को लंदन में हुए बम धमाकों के बाद से मुसलमानों के ख़िलाफ़ जातीय हिंसा की घटनाएँ बढ़ी हैं.

लंदन की मैट्रोपोलिटन पुलिस के अनुसार लंदन बम धमाकों के बाद धर्म के आधार पर नफ़रत की 269 घटनाएँ हुई हैं जबकि साल 2004 में इसी अवधि में इस तरह की मात्र 40 घटनाएँ हुई थीं.

पुलिस ने कहा है कि ज़्यादातर घटनाओं में ज़ुबानी बदतमीज़ी की गई और छोटे-मोटे हमले भी किए गए. मुसलमानों की संपत्ति को नुक़सान पहुँचाया जा रहा है जिनमें मस्जिदें भी शामिल हैं.

'लचीलापन'

डॉक्टर ज़की बदावी ने बुधवार को कहा, "आज के तनावपूर्ण हालात में, जब मुसलमानों के ख़िलाफ़ जातीय नफ़रत की घटनाएँ बढ़ी हैं, हम उन मुस्लिम औरतों को सलाह देते हैं जिन्हें किसी तरह के हमले का डर है, वे हिजाब ना पहनें ताकि उन लोगों से बच सकें जो मुसलमानों के लिए अदावत रखते हैं."

मुस्लिम औरत
कुछ मुस्लिम औरतें हिजाब पहनती हैं

उन्होंने कहा, "हिजाब पहनने वाली औरतें ग़ैरज़िम्मेदार तत्वों की बदतमीज़ी का शिकार हो सकती हैं, इसलिए उन्हें हिजाब नहीं पहनना चाहिए. कोई भी ख़ास परिधान नुक़सान से बचाने के लिए होता है, न कि नुक़सान को न्यौता देने के लिए."

डॉक्टर ज़की बदावी ने कहा कि क़ुरान में भी यह कहा गया है कि हिजाब से मुस्लिम औरत की पहचान बननी चाहिए और इससे बदनज़रों से बचने में भी मदद मिलनी चाहिए लेकिन यह भी कहा गया है कि अगर हिजाब की वजह से किसी तरह की परेशानी का सामना करना पड़े तो इसे नहीं पहना जाना चाहिए.

डॉक्टर ज़की बदावी को एक प्रगतिशील मुस्लिम विद्वान माना जाता है जिन्होंने ब्रितानी समाज में मुसलमानों के और ज़्यादा घुलने-मिलने का समर्थन किया है.

मैट्रोपोलिटन पुलिस के सहायक आयुक्त तारिक़ ग़फ़ूर ने कहा कि उन्होंने मुस्लिम युवाओं में इतना ग़ुस्सा पहले कभी नहीं देखा.

उन्होंने कहा कि मुस्लिम समुदाय में ख़ासतौर से इस बात पर बहुत नाराज़गी है कि किसी को भी रोककर तलाशी लेने और हिफ़ाज़त की ख़ातिर आत्मघाती हमलावर को गोली मार देने के अधिकारों का अति प्रयोग हो रहा है.

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