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बुधवार, 27 जुलाई, 2005 को 00:45 GMT तक के समाचार
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'लंदन हमलों के लिए इराक़ कारण नहीं'
टोनी ब्लेयर
प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने कहा है कि लंदन में बम विस्फोटों के लिए इराक़ कोई कारण नहीं है. लेकिन उन्होंने माना कि आतंकवादियों की भर्ती के लिए इराक़ का इस्तेमाल किया जा रहा है.

प्रधानमंत्री ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि आतंकवाद की जड़े बहुत गहरी हैं. उन्होंने कहा कि 11 सितंबर 2001 की घटना अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए एक सबक थी लेकिन कुछ लोगों ने इस पर ध्यान नहीं दिया.

प्रधानमंत्री ब्लेयर ने कहा, "हमें ऐसे लोगों की निर्लज्जता को सार्वजनिक करने की ज़रूरत है जो ये कहते हैं कि इराक़ की चिंता के कारण वे आतंकवाद की ओर मुड़ते हैं. अगर ये वाक़ई इराक़ के कारण चिंता है तो वहाँ वे बच्चों के बीच कार बम का धमाका क्यों कर रहे हैं."

एक घंटे से ज़्यादा समय तक चले संवाददाता सम्मेलन में ब्लेयर ने कहा कि ऐसे लोगों से हर स्तर पर मुक़ाबले की आवश्यकता है.

उन्होंने कहा, "इस समस्या की जड़े बहुत गहरी हैं और जब तक हम सभी ऐसे लोगों का मुक़ाबला हरेक स्तर पर नहीं करते हम इस समस्या से नहीं निपट सकते. हमें न सिर्फ़ इनके तरीक़ों से निपटना है बल्कि इनके विचारों से भी निपटना है."

प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने कहा कि आत्मघाती बम हमलों को किसी भी रूप में सही नहीं ठहराया जा सकता. चाहे वो फ़लस्तीनी क्षेत्र हो, इराक़ हो, लंदन हो, तुर्की हो, मिस्र हो या कहीं और की बात हो.

इससे पहले प्रधानमंत्री से मुलाक़ात के बाद कंज़र्वेटिव नेता माइकल हॉवर्ड ने कहा कि प्रधानमंत्री ब्लेयर इस बात पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं कि 'फ़ोन टेपिंग' को एक सबूत के रूप में अदालत में स्वीकार करने की अनुमति दी जाए.

नए क़दम

प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने कहा है कि उनकी सरकार लंदन हमलों के बाद आतंकवाद के ख़िलाफ़ नए क़दम उठाने पर विचार कर रही है. ब्लेयर ने इन क़दमों के बारे में जानकारी भी दी.

 हमें ऐसे लोगों की निर्लज्जता को सार्वजनिक करने की ज़रूरत है जो ये कहते हैं कि इराक़ की चिंता के कारण वे आतंकवाद की ओर मुड़ते हैं. अगर ये वाक़ई इराक़ के कारण चिंता है तो वहाँ वे बच्चों के बीच कार बम का धमाका क्यों कर रहे हैं
टोनी ब्लेयर

इस महीने लंदन में हुए हमलों में 50 से ज़्यादा लोग मारे गए थे. आतंकवाद के ख़िलाफ़ नए क़दमों में पुस्तकों की दूकानों पर भी नज़र होगी.

ऐसे प्रकाशकों पर भी गाज गिर सकती है जो चरमपंथ को बढ़ावा देने वाली सामग्री छापते हैं या बेचते हैं. सरकार की नज़र उन वेबसाइट पर भी होगी जो हिंसा को बढ़ावा देते हैं. ऐसी वेबसाइट बंद की जा सकती हैं.

प्रधानमंत्री ब्लेयर ने इस बात के भी संकेत दिए कि वे पुलिस की उस मांग से भी सहानुभूति रखते हैं जिसमें कहा गया है कि संदिग्ध व्यक्ति को बिना किसी आरोप के 14 दिनों के बजाय तीन महीने तक हिरासत में रखने की अनुमति हो.

प्रधानमंत्री ब्लेयर ने आतंकवाद के ख़िलाफ़ उठाए जाने वाले नए क़दमों के बारे में विपक्षी नेताओं से बातचीत की. विपक्षी नेताओं ने सरकार के प्रस्ताव पर संदेह व्यक्त किया और कहा कि इससे बुनियादी नागरिक स्वतंत्रता पर आँच आ सकती है.

हालाँकि विपक्ष आतंकवाद के ख़िलाफ़ नए क़ानून लाने पर प्रधानमंत्री ब्लेयर को पहले ही समर्थन दे चुका है.

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