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बुधवार, 03 अगस्त, 2005 को 03:24 GMT तक के समाचार
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'मुसलमानों के ख़िलाफ़ घटनाएँ बढ़ीं'
लंदन पुलिस
पुलिस चौकसी बढ़ाई गई है
लंदन पुलिस ने कहा है कि सात जुलाई को लंदन में हुए बम धमाकों के बाद से मुसलमानों के ख़िलाफ़ जातीय हिंसा की घटनाएँ बढ़ी हैं.

लंदन की मैट्रोपोलिटन पुलिस के अनुसार लंदन बम धमाकों के बाद धर्म के आधार पर नफ़रत की 269 घटनाएँ हुई हैं जबकि साल 2004 में इसी अवधि में इस तरह की मात्र 40 घटनाएँ हुई थीं.

पुलिस ने कहा है कि ज़्यादातर घटनाओं में ज़ुबानी बदतमीज़ी की गई और छोटे-मोटे हमले भी किए गए. मुसलमानों की संपत्ति को नुक़सान पहुँचाया जा रहा है जिनमें मस्जिदें भी शामिल हैं.

लंदन पुलिस ने कहा है कि लंदन बम धमाकों के बाद उस पर इतना दबाव बढ़ गया है कि प्रमुख घटनाओं की जाँच-पड़ताल 'धीमी' पड़ गई है.

ग़ौरतलब है कि लंदन बम धमाकों में 52 लोगों की मौत हो गई थी और 700 से ज़्यादा घायल हुए थे.

मेट्रोपोलिटन पुलिस के सहायक आयुक्त तारिक़ गफ़ूर ने मंगलवार को कहा कि लंदन बम धमाकों के बाद तीन दिन में राजधानी में 'धर्म के आधार पर नफ़रत के 68 अपराध' हुए, जबकि 2004 में इसी अवधि में एक भी ऐसी घटना नहीं हुई थी.

तारिक़ गफ़ूर का कहना था कि उन्हें इस बात का डर है कि कहीं मुस्लिम समुदाय इस तरह की घटनाओं के कारण अपने आप में सिमट कर ना रह जाए और चरमपंथियों को अलग-थलग करने में पुलिस की मदद करने के लिए आगे आने से झिझके.

"इसमें कोई शक नहीं है कि मुस्लिम समुदाय पर प्रभाव डालने वाली घटनाओं में बढ़ोत्तरी हुई है."

गफ़ूर ने कहा कि आत्मघाती हमले रोकने के लिए राह चलते लोगों को रोक-रोक कर तलाशी की जो रणनीति अपनाई जा रही है उससे युवा मुसलमान सख़्त नाराज़ हैं और ऐसा ग़ुस्सा उन्होंने पहले कभी नहीं देखा.

कोशिश

हालाँकि ब्रिटिश सरकार नस्ल और धर्म पर आधारित हिंसा को रोकने के लिए विभिन्न समुदायों के बीच संबंध बेहतर करने की कोशिश में भी जुटी हुई है.

सकारात्मक क़दम
 पहली बार सरकार ने कोई सकारात्मक क़दम उठाया है. हमें स्थिति में सुधार करना होगा. सरकार ने यह माना कि वो सही लोगों से बात नहीं कर रही थी. अब हमें और लोगों से बात करके स्थिति को बेहतर करना है.
तारिक़ रफ़ीक

मंगलवार को गृह मंत्रालय में एक वरिष्ठ अधिकारी हेज़ल ब्लीयर्स ने ओल्डहैम का दौरा किया और वहाँ विभिन्न समुदाय के लोगों से मुलाक़ात की.

ओल्डहैम में सर्वधर्म समूह चलाने वाले तारिस रफ़ीक ने इस बारे में कहा, "पहली बार सरकार ने कोई सकारात्मक क़दम उठाया है. हमें स्थिति में सुधार करना होगा. सरकार ने यह माना कि वो सही लोगों से बात नहीं कर रही थी. अब हमें और लोगों से बात करके स्थिति को बेहतर करना है."

लेकिन ब्लीयर्स के ओल्डहैम दौरे को लेकर सभी इतने उत्साहित नहीं थे. ओल्डहैम में युवा मुसलमानों के लिए एक पत्रिका का संपादन करने वाले ज़ाहिद मक़बूल कहते हैं, "हमने हेज़ल से कई सवाल पूछे. उन्हें हमारी सुध लेने का समय इतनी देर से मिला है. उन्होंने हमारे सवालों के सीधे जवाब भी नहीं दिए."

"हम विदेश नीति पर और अतिवादी मुसलमानों के बारे में अपने सवालों के जवाब चाहते थे लेकिन उन्होंने कुछ स्पष्ट उत्तर नहीं दिया."

जानकारों का कहना है कि लंदन बम धमाकों के बाद मुस्लिम समुदाय काफ़ी दबाव में है और इस दबाव को कम करने के लिए व्यापक स्तर पर कुछ करने की आवश्यकता है.

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