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एक ब्रिटिश मुस्लिम की मिसाल | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अफ़ग़ानिस्तान में तालेबान के एक हमले में जान गँवाने वाले ब्रितानी मुस्लिम सैनिक जिबरान हाशमी के परिवार का कहना है कि जिबरान ने विभिन्न संस्कृतियों के लोगों के बीच खाई को पाटने के प्रयासों के तहत अपनी जान दी है. ग़ौरतलब है कि पाकिस्तानी मूल के ब्रितानी नागरिक 24 वर्षीय कोर्पोरल जिबरान हाशमी की गत शनिवार को हेरमंद प्रांत में तालेबान के एक हमले में मौत हो गई थी. उनके साथ उनके साथी कोर्पोरल पीटर थोर्पे भी मारे गए थे. ब्रिटेन के बरमिंघम इलाक़े से संबंध रखने वाले जिबरान हाशमी पहले ऐसे ब्रितानी मुस्लिम सैनिक हैं जिन्होंने अफ़ग़ानिस्तान में सैन्य कार्रवाई के दौरान जान दी है. हाशमी परिवार का कहना है कि वे यह सोचकर गौर्वान्वित महसूस कर रहे हैं कि जिबरान हाशमी ने एक ब्रिटिश मुस्लिम पाकिस्तानी के रूप में सेना में सेवा की है. जिबरान हाशमी के भाई 27 वर्षीय ज़ीशान हाशमी का कहना था, "पाकिस्तानी पृष्ठभूमि वाले एक मुस्लिम ब्रिटिश नागरिक के रूप में जिबरान हाशमी ने समझा था कि उनकी एक विशेष स्थिति है और इस स्थिति का इस्तेमाल अच्छा काम करने के लिए इस्तेमाल करना चाहिए." "आज के दौर में बहुत सी समस्याएँ एक दूसरे की संस्कृति को नहीं समझ पाने के नतीजे की वजह से हैं और जिबरान ने इन समस्याओं को समझा था, ब्रिटिश सेना में भर्ती होने का इरादा करके और फिर लड़ाई के लिए अफ़ग़ानिस्तान जाकर, वह जानता था कि शायद उसकी बेहतरीन तैनाती हुई है जिसके ज़रिए वह संस्कृतियों के बीच की खाई को पाटने में मदद कर सकता है." बचपन की महत्वाकांक्षा जिबरान हाशमी का जन्म पाकिस्तान के पेशावर में हुआ था और जब उसकी उम्र 12 साल थी तब उसका परिवार ब्रिटेन में आ बसा था.
जिबरान हाशमी ब्रिटिश सेना में जून 2004 में भर्ती हुए और शुरू में इंटेलीजेंस कोर में सेवा की और वह रॉयल सिगनल के साथ अटैच थे. ज़ीशान हाशमी बताते हैं कि जिबरान को शुरू से ही सेना से बहुत लगाव था. वह बताते हैं कि जब हाशमी परिवार ब्रिटेन में आकर बस गया तो सेना के लिए जिबरान की महत्वाकांक्षा जारी रही और जब उन्हें ब्रिटिश सेना में भर्ती होने का मौक़ा मिल गया तो वह बहुत ही ख़ुश हुए. ज़ीशान हाशमी ने बताया कि जिबरान लगभग छह सप्ताह के अफ़ग़ानिस्तान में तैनात थे और वहाँ अपनी तैनाती से ख़ुश थे, अलबत्ता पिछली बार जब बात हुई तो वह कुछ थके हुए लगे थे क्योंकि ड्यूटी काफ़ी लंबी होती थी और सफ़र बहुत करना पड़ता था. जिबरान हाशमी के कमांडिंग ऑफ़िसर लैफ़्टिनेंट कर्नल स्टीव विकेरी ने उन्हें एक ऐसा युवक बताया जो जोशो-ख़रोश, आत्मविश्वास से भरपूर था और सहयोगियों में बहुत लोकप्रिय भी. ब्रिटिश सेनाओं में जो लगभग दो लाख जवान हैं उनमें से 906 एशियाई मूल के हैं और 320 मुस्लिम हैं. जिबरान हाशमी भी उनमें से एक थे. | इससे जुड़ी ख़बरें सात जुलाई से सबक लें-मुस्लिम सांसद05 जुलाई, 2006 | पहला पन्ना 'हमलों के मामले में बंटे हैं ब्रितानी मुस्लिम'04 जुलाई, 2006 | पहला पन्ना क्या है सच्चाई पाकिस्तानी मदरसों की?05 जुलाई, 2006 | पहला पन्ना मुस्लिम समुदाय में असुरक्षा की भावना08 जुलाई, 2005 | पहला पन्ना ब्रितानी मुसलमानों में चिंता की लहर13 जुलाई, 2005 | पहला पन्ना लंदनः कब क्या हुआ22 जुलाई, 2005 | पहला पन्ना हमलावरों की ज़ोर-शोर से तलाश22 जुलाई, 2005 | पहला पन्ना ब्रितानी पुलिस नीति नहीं बदलेगी25 जुलाई, 2005 | पहला पन्ना इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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