|
'लंदन बम धमाकों को रोक सकते थे' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ब्रिटेन की एक संसदीय समिति ने कहा है कि लंदन में सात जुलाई 2005 को हुए बम धमाकों को रोकने की संभावनाएँ हो सकती थीं, बशर्ते पुलिस, सुरक्षा और ख़ुफ़िया सेवाओं ने और बेहतर तरीके से काम किया होता. समिति ने कहा है कि अगर ब्रितानी सुरक्षा सेवाओं के पास बेहतर संसाधन होते और जाँच के दौरान महत्वपूर्ण फ़ैसले लिए गए होते तो उन धमाकों के बारे में पहले से जानकारी हासिल की जा सकती थी और हमलों को रोकने की ज़्यादा संभावनाएँ होतीं. इस रिपोर्ट में कहा गया है कि "देश में ही पनपने वाले आतंकवाद" के ख़तरे का मुक़ाबला करने के लिए देश की सुरक्षा सेवाओं, ख़ुफ़िया सेवा एमआई-5 और पुलिस के मिलकर काम करने के तरीके में और सुधार होना चाहिए. ग़ौरतलब है कि गुरूवार सात जुलाई 2005 को हुए उन बम धमाकों में 52 लोगों की मौत हो गई थी और सैकड़ों अन्य घायल हुए थे. लंदन में उस दिन तीन रेलगाड़ियों और एक बस में बम धमाके उस समय हुए थे जब सुबह को दफ़्तर और काम पर जाने वालों की भारी भीड़ होती है. संसदीय समिति की जाँच रिपोर्ट में कहा गया है कि सुरक्षा सेवाओं के पास अगर ज़्यादा संसाधन और कर्मचारी होते तो उन बम धमाकों को पहले से ही रोकने की संभावनाएँ ज़्यादा होतीं. रिपोर्ट में उदाहरण देते हुए कहा गया है कि सुरक्षा सेवाओं के पास एक संदिग्ध बम हमलावर का फ़ोन नंबर पहले से ही मौजूद था लेकिन रिपोर्ट में पूरी ज़िम्मेदारी सिर्फ़ सुरक्षा सेवाओं पर ही नहीं डाली गई है. रिपोर्ट में सुरक्षा सेवाओं को लापरवाही के आरोप से मुक्त करते हुए कहा गया है कि अगर जाँच-पड़ताल के लिए उनके पास ज़्यादा समय, धन, ठोस प्रक्रिया और ज़्यादा लोग होते तो ठोस कामयाबी मिलने की संभावना ज़्यादा होती. रिपोर्ट में आगाह किया है कि 'आतंकवादी ख़तरों' को देखते हुए सुरक्षा सेवाओं की जाँच-पड़ताल वाली गतिविधियाँ बढ़ेंगी जिन्हें लोगों के जीवन में हस्तक्षेपकारी माना जा सकता है. सांसदों ने इस रिपोर्ट में कहा है कि सुरक्षा सेवाओं को तीस वर्षीय मोहम्मद सिद्दीक ख़ान और उसके सहयोगी शहज़ाद तनवीर के बारे में जानकारी मिल गई थी कि उन्होंने पाकिस्तान का दौरा किया था और "इस बात की बहुत संभावना थी कि वहाँ वे अल क़ायदा के सदस्यों के संपर्क में आए हों." रिपोर्ट कहती है, "पाकिस्तान में ज़्यादा निगरानी और ब्रिटेन में ज़्यादा संसाधनों के इस्तेमाल से एजेंसियों को सात जुलाई के बम धमाके करने वालों के इरादों की जानकारी हासिल करने में मदद मिल सकती थी. ख़तरा विभिन्न पार्टियों के सासंदों की इस समिति ने चिंता व्यक्त की है कि "देश में ही पनपने वाले ख़तरे" का मुक़ाबला करने के लिए पर्याप्त उपाय नहीं किए गए हैं.
रिपोर्ट कहती है कि "ब्रितानी नागरिकों में कट्टरपंथी या विद्रोही भावनाओं" को अभी तक पूरी तरह समझा नहीं गया है और ख़ुफ़िया एजेंसियों ने उन पर गंभीरता से विचार नहीं किया है. समिति ने ख़तरों के स्तर के बारे में आम लोगों को सतर्क करने की एक कारगर प्रणाली बनाने का आहवान किया है. एक सरकारी प्रवक्ता ने कहा कि सरकार इस बात से सहमत है कि ख़तरों के स्तर के बारे में ज़्यादा पारदर्शिता रखने से सरकारी उपाय ज़्यादा कारगर होंगे और इससे आम लोगों में विश्वास और सतर्कता भी बढ़ेगी. सुरक्षा सेवाओं ने उन आरोपों को ख़ारिज कर दिया है कि एक प्रमुख चरमपंथी सात जुलाई के हमलों से कुछ ही पहले ब्रिटेन से बाहर गया था. ब्रिटेन की ख़ुफ़िया एजेंसी एमआई-5 को पता चला था कि उसकी फ़ाइल पर एक टेलीफ़ोन नंबर था जो सात जुलाई के धमाकों के एक अभियुक्त जर्माइन लिंडसे का था. एजेंसी ने कहा है कि इस तरह की कोई ख़ुफ़िया जानकारी नहीं मिली है कि उन बम धमाकों में पाँचवें हमलावर या और ज़्यादा हमलवारों का कोई हाथ था. | इससे जुड़ी ख़बरें धमाकों में मरने वालों की संख्या 49 हुई08 जुलाई, 2005 | पहला पन्ना मुस्लिम समुदाय में असुरक्षा की भावना08 जुलाई, 2005 | पहला पन्ना हमलों के बाद सामान्य होता जनजीवन08 जुलाई, 2005 | पहला पन्ना लंदन में आतंक की दस्तक:अख़बार08 जुलाई, 2005 | पहला पन्ना लंदन धमाकों में अल क़ायदा पर संदेह08 जुलाई, 2005 | पहला पन्ना लंदन विस्फोटः चश्मदीदों के अनुभव07 जुलाई, 2005 | पहला पन्ना जी-8 पर बम धमाकों की गहरी छाया07 जुलाई, 2005 | पहला पन्ना लंदन में बम धमाके, 35 से अधिक मरे07 जुलाई, 2005 | पहला पन्ना इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||