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हमलों के बाद सामान्य होता जनजीवन | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
लंदन के लोग चरमपंथी हमलों के एक दिन बाद शुक्रवार को सामान्य दिनों की तरह काम पर लौट रहे हैं. पुलिस ने 50 लोगों के मारे जाने और 700 से ज़्यादा अन्य के घायल होने की पुष्टि की है. गुरुवार को लंदन में तीन भूमिगत ट्रेनों और एक डबल-डेकर बस को विस्फोटकों का निशाना बनाया गया था. इस बीच हमलावरों का पता लगाने के प्रयास भी तेज़ हो गए हैं. हालाँकि ब्रिटेन के गृह मंत्री चार्ल्स क्लार्क ने कहा है कि हमलावरों का पता लगाना भूसे के ढेर में सूई तलाशने के समान है. उन्होंने कहा कि एक वेबसाइट पर प्रकाशित उस दावे को सरकार गंभीरता से ले रही है जिसमें कि एक संगठन ने धमाके की ज़िम्मेदारी ली है. क्लार्क ने लोगों से आम दिनों की तरह ही कामकाज़ में लग जाने की अपील की है. आज ब्रिटेन की महारानी एलिज़ाबेथ और राजकुमार चार्ल्स हमलों में घायल कुछ लोगों को देखने जाएँगे. बहाल हुई रेल व्यवस्था शुक्रवार सवेरे भूमिगत ट्रेनों और बसों का परिचालन शुरू हो गया. हालाँकि यात्रियों को आगाह किया गया है कि कुछ परिवहन सेवाएँ बाधित हो सकती हैं.
पुलिस ने मध्य लंदन के कई इलाक़ों से अवरोधों को हटा लिया है जो कि धमाकों के बाद लगाए गए थे. लेकिन पुलिस ने आम लोगों से सतर्कता बढ़ाने को कहा है. पुलिस को अभी तक हमलावरों के बारे में कोई ख़ास सुराग नहीं मिल पाया है. हालाँकि ब्रितानी सरकार ने हमलों के लिए मुस्लिम चरमपंथियों को ज़िम्मेवार ठहराया है. ब्रितानी विदेश मंत्री जैक स्ट्रॉ ने कहा है कि धमाकों पर अल-क़ायदा की छाप साफ दिखती है. पुलिस अभी यह बताने की स्थिति में नहीं है कि क्या किसी हमले में आत्मघाती हमलावर शामिल था. |
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