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शनिवार, 22 अप्रैल, 2006 को 16:01 GMT तक के समाचार
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जवाद अल मलिकी का जीवन परिचय
जवाद अल मलिकी
मलिकी ने अरबी साहित्य में अध्ययन किया है
इराक़ के मनोनीत प्रधानमंत्री जवाद अल मलिकी शिया राजनीतिक दल - दावा पार्टी के धुरंधर नेता रहे हैं.

दावा पार्टी ने सद्दाम हुसैन के नेतृत्व वाली धर्मनिर्पेक्ष बाथ पार्टी के ख़िलाफ़ वर्षों तक सशस्त्र भूमिगत आंदोलन चलाया था.

1980 के दशक में जब बाथ पार्टी की सरकार ने अपने विरोधियों की तलाश शुरू की तो दावा पार्टी के अन्य नेताओं की ही तरह मलिकी निर्वासन में चले गए और 1980 में तो देश छोड़कर सीरिया में पनाह ले ली.

2003 में सद्दाम हुसैन का शासन समाप्त होने के बाद दावा पार्टी एक राजनीतिक ताक़त के रूप में उभरी और जवाद अल मलिकी को उसके वरिष्ठ नेताओं में पहचान मिली.

मलिकी दावा पार्टी के ही नहीं बल्कि पूरे शिया गठबंधन के प्रवक्ता भी रह चुके हैं. शिया अलायंस को ही दिसंबर 2005 में हुए चुनाव में सबसे ज़्यादा सीटें मिली हैं.

जवाद अल मलिकी दावा पार्टी के ही अन्य नेता और निवर्तमान प्रधानमंत्री इब्राहीम अल जाफ़री के वरिष्ठ सलाहकार भी रह चुके हैं. सुन्नी और कुर्द समुदायों के सांसद जाफ़री का विरोध कर रहे थे जिसकी वजह से शिया अलायंस ने मलिकी को प्रधानमंत्री पद के लिए नई पसंद चुना.

जवाद अल मलिकी दावा पार्टी के उपनेता रहे हैं और कहा जाता है कि उनका जन्म इराक़ी शहर हिल्ला में 1950 में हुआ था. उन्होंने बग़दाद विश्वविद्यालय में अरबी साहित्य में अध्ययन किया.

मलिकी एक विवाहित व्यक्ति हैं और चार बच्चों के पिता हैं. मलिकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई ज़्यादा जाना-पहचाना चेहरा नहीं रहे हैं.

हालाँकि इराक़ पर अमरीकी गठबंधन वाले हमले के बाद से इराक़ की राजनीतिक दिशा तय करने में मलिकी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है.

मलिकी ने इराक़ का नया संविधान बनाने में अहम भूमिका निभाई क्योंकि वह संविधान बनाने वाली समिति के सदस्य रहे हैं. इस समिति का गठन अमरीका ने किया था.

जवाद अल मलिकी

इस समिति का काम इराक़ को बाथ पार्टी के प्रभाव से बाहर निकालना था. इस समिति की अबत्ता यह कहते हुए आलोचना भी हुई थी कि इसने उन अधिकारियों को भी निशाना बनाया जो सिर्फ़ नाम के लिए बाथ पार्टी से जुड़े थे.

दिसंबर 2005 में चुनाव के बाद मलिकी ने एक ऐसी सरकार के गठन में सहायता की जिससे विभिन्न धार्मिक और राजनीतिक गुटों को एक साथ लाकर देश की एकता सुनिश्चित करने में मदद मिले.

मलिकी के बारे में कहा जाता है कि वह इराक़ के शिया समुदाय पर होने वाले हमलों के प्रबल आलोचक हैं और सुन्नियों के नेतृत्व वाली विद्रोही गतिविधियों का मुक़ाबला करने के लिए अमरीकी सेनाओं जो रणनीति अपना रही हैं, मलिकी उनकी भी आलोचना करते हैं.

बहुलवादी इराक़

शुरू में मलिकी को प्रधानमंत्री पद के लिए कोई मज़बूत उम्मीदवार नहीं माना जाता था क्योंकि वह इब्राहीम अल जाफ़री के काफ़ी नज़दीक थे लेकिन सुन्नी और कुर्द समुदायों ने जाफ़री के नाम का विरोध किया.

बीबीसी संवाददाता जेम्स रेनॉल्ड्स का कहना है कि मलिकी जाफ़री के विरोधियों का भरोसा जीतने में कामयाब हो पाते हैं या नहीं, यह उनकी नीतियों की बजाय उनके व्यक्तित्व पर ज़्यादा निर्भर होगा.

मलिकी ने राजनीतिक वनवास से बाहर आने से पहले कहा था कि वह इराक़ को एक ऐसे देश के रूप में देखना चाहते हैं जहाँ सभी जातीय और धार्मिक समुदाय ख़ुद को बराबर समझते हए रहें.

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