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मुक्त व्यापार क्षेत्र पर सहमति नहीं बनी | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीकी महाद्वीप के 34 देशों का सम्मेलन बिना किसी सहमति के ख़त्म हो गया है. अर्जेंटीना में हुए 34 देशों के सम्मेलन में अमरीका के मुक्त व्यापार क्षेत्र के प्रस्ताव पर विवाद बना रहा. इन देशों के नेता अमरीकी प्रस्ताव पर मतभेद नहीं सुलझा सके. अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने इस प्रस्ताव को ज़ोर-शोर से नेताओं के सामने रखा. लेकिन कई देशों ने इसका कड़ा विरोध किया. विरोध करने वाले नेताओं में वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति ह्यूगो शावेज़ भी शामिल थे. बातचीत की मध्यस्थता कर रहे शावेज़ ने कहा कि कई घंटों तक चली बातचीत के बाद भी कोई निष्कर्ष नहीं निकला. 34 में से 29 देशों के नेताओं का कहना था कि वे प्रस्तावित नीति पर बातचीत के लिए तैयार हैं लेकिन पाँच देश इसके लिए तैयार नहीं थे. मुक्त व्यापार क्षेत्र के समर्थकों का कहना है कि इससे नए बाज़ार खुलेंगे लेकिन इसके विरोधियों का कहना है कि इससे आर्थिक विकास के लिए और ग़रीबी हटाने की दिशा में कुछ भी नहीं होगा. विरोध राष्ट्रपति जॉर्ज बुश की नीति का सबसे ज़्यादा विरोध कर रहे हैं दक्षिण अमरीकी देश. इन देशों का कहना है कि इससे उनकी अर्थव्यवस्था तबाह हो जाएगी.
वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति ह्यूगो शावेज़ का कहना है कि ये देश एक चट्टान की तरह इस प्रस्ताव के विरोध में खड़े हैं. प्रस्ताव पर जारी मतभेद के कारण अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश पहले ही इस सम्मेलन से चले गए थे. राष्ट्रपति बुश के जाने के बाद से विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बातचीत में शिरकत की. बीबीसी संवाददाता जेम्स कुमारस्वामी का कहना है कि यह सम्मेलन राष्ट्रपति बुश के लिए कठिन रहा क्योंकि सम्मेलन में और सम्मेलन के बाहर उन्हें विरोध का सामना करना पड़ा. राष्ट्रपति बुश की अनुपस्थिति में सम्मेलन के घोषणापत्र पर हस्ताक्षर हुए जिसमें विरोधी पक्ष के विचारों को भी जगह दी गई. 29 देशों का कहना है कि वे मुक्त व्यापार क्षेत्र पर अगले साल भी बातचीत करना चाहेंगे. लेकिन पाँच देश- ब्राज़ील, अर्जेंटीना, वेनेज़ुएला, उरुग्वे और पराग्वे का कहना है कि वे पहले अगले महीने हाँगकाँग में होने वाले विश्व व्यापार संगठन (डब्लूटीओ) की बैठक के नतीजे का इंतज़ार करना चाहते हैं. हालाँकि राष्ट्रपति बुश सहित कई देशों के नेताओं को उम्मीद थी कि इस सम्मेलन के घोषणापत्र में मुक्त व्यापार क्षेत्र पर बातचीत जारी रखने पर सहमति हो जाएगी. पहली बार 1994 में मियामी में अमरीकी महाद्वीप के देशों के सम्मेलन में यह विचार रखा गया था. लेकिन वेनेज़ुएला की अगुआई में इस प्रस्ताव का विरोध करने वाले देश अड़े रहे. वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति शावेज़ ने तो शुक्रवार को एक फ़ुटबॉल स्टेडियम में 40 हज़ार लोगों की शांतिपूर्ण रैली को संबोधित किया और कहा कि मुक्त व्यापार क्षेत्र की नीति मर चुकी है और उसे यहाँ दफ़न करने जा रहे हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें सम्मेलन के लिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था04 नवंबर, 2005 | पहला पन्ना यूरोपीय संघ आयात शुल्क घटाने को तैयार28 अक्तूबर, 2005 | कारोबार कपास सब्सिडी पर अमरीका की शिकस्त04 मार्च, 2005 | कारोबार सब्सिडी पर अमरीका की सतर्क प्रतिक्रिया04 मार्च, 2005 | कारोबार भारत-पाक व्यापार बढ़ाने की कोशिश09 अगस्त, 2005 | भारत और पड़ोस भारत और पाकिस्तान को व्यापार राहत30 जून, 2005 | कारोबार भारत का व्यापार घाटा क़ाबू में: रेड्डी24 जून, 2005 | कारोबार भारतीय निर्यात रिकॉर्ड स्तर पर पहुँचा08 अप्रैल, 2005 | कारोबार इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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