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कपास सब्सिडी पर अमरीका की शिकस्त | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ब्राज़ील के साथ कपास उत्पादकों को सब्सिडी देने के विवाद पर अमरीका को शिकस्त मिली है. विश्व व्यापार संगठन ने उस फ़ैसले को सही ठहराया है जिसमें कहा गया था कि अमरीका के कपास उत्पादकों को सरकार से मिलने वाली वित्तीय सहायता अंतरराष्ट्रीय व्यापार क़ानून का उल्लंघन है. अफ़्रीका के चार कपास उत्पादक देशों माली, बुरकिना फासो, चैड और बेनिन गणराज्य ने इस मामले में ब्राज़ील का समर्थन किया था. ब्राज़ील का कहना था कि अमरीकी सब्सिडी के कारण दुनिया में कपास की क़ीमतों पर असर पड़ता है और ब्राज़ील सहित कई देशों के कपास उत्पादकों इससे नुक़सान होता है. विश्व व्यापार संगठन के इस फ़ैसले के बाद अमरीका को अब अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों के मुताबिक़ सब्सिडी कम करनी होगी. बयान एक बयान में विश्व व्यापार संगठन की अपील संस्था ने कहा कि अमरीकी नीति अंतरराष्ट्रीय समझौते के अनुरूप नहीं है. अमरीका ने अपनी अपील में कहा था कि विश्व व्यापार संगठन के जजों ने सब्सिडी के बारे में ग़लत निष्कर्ष निकाला है. विश्व व्यापार संगठन का फ़ैसला ऐसे समय आया है जब 30 देशों के व्यापार मंत्रियों की कीनिया में बैठक हो रही है जिसका मक़सद दोहा दौर में मुक्त व्यापार क्षेत्र में बातचीत पर विचार-विमर्श करना है. हालाँकि अमरीका विश्व व्यापार संगठन में हार गया है लेकिन अब देखने वाली बात होगी कि वह कितने समय में सब्सिडी ख़त्म करता है. अमरीका का कहना है कि कोई भी बदलाव दोहा दौर के किसी भी समझौते में शामिल करना होगा. दिसंबर तक दोहा दौर की बातचीत के बाद घोषणापत्र आने की उम्मीद व्यक्त की जा रही है जब हाँगकाँग में दुनियाभर के व्यापार मंत्रियों की बैठक होगी. विश्व व्यापार संगठन में भारत के मुख्य वार्ताकार गोपाल पिल्लई ने अमरीका की कपास नीति के ख़िलाफ़ आए फ़ैसले का स्वागत किया है. उन्होंने कहा कि अमरीकी किसानों को दी जा रही सब्सिडी व्यापार नियमों का उल्लंघन है. पिल्लई ने कहा कि इसी कारण एशिया और अफ़्रीका के किसानों को अपने कपास पर अच्छी क़ीमत नहीं मिल रही थी. |
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