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सब्सिडी पर अमरीका की सतर्क प्रतिक्रिया | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका ने विश्व व्यापार संगठन के उस बयान पर सतर्क प्रतिक्रिया ज़ाहिर की है जिसमें कहा गया है कि अमरीका में किसानों को दी जाने वाली सब्सिडी ग़ैरक़ानूनी है. ग़ौरतलब है कि विश्व व्यापार संगठन ने उस फ़ैसले को सही ठहराया है जिसमें कहा गया था कि अमरीका के कपास उत्पादकों को सरकार से मिलने वाली वित्तीय सहायता अंतरराष्ट्रीय व्यापार क़ानून का उल्लंघन है. अमरीकी व्यापार विभाग के एक प्रवक्ता ने शुक्रवार को कहा कि सरकार सभी विकल्पों पर विचार कर रही है और क़ानूनी लड़ाई के बजाय बातचीत से रास्ता निकालना ही एक बेहतर विकल्प हो सकता है. अभी इस बारे में कोई सूचना नहीं है कि सब्सिडी कब वापस ली जा सकती है. वाशिंगटन में बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इस तरह की शंकाएँ व्यक्त की गई हैं कि अमरीका कपास पर सब्सिडी हटाने के इस मामले को विश्व व्यापार बातचीत के मौजूदा दौर तक टालने की कोशिश कर सकता है, जबकि यह दौर साल 2007 तक चलने की संभावना है. अफ़्रीका के चार कपास उत्पादक देशों माली, बुरकिना फासो, चैड और बेनिन गणराज्य ने इस मामले में ब्राज़ील का समर्थन किया था. ब्राज़ील का कहना था कि अमरीकी सब्सिडी के कारण दुनिया में कपास की क़ीमतों पर असर पड़ता है और ब्राज़ील सहित कई देशों के कपास उत्पादकों इससे नुक़सान होता है. विश्व व्यापार संगठन के इस फ़ैसले के बाद अमरीका को अब अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों के मुताबिक़ सब्सिडी कम करनी होगी. |
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