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भारतीय निर्यात रिकॉर्ड स्तर पर पहुँचा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पिछले वित्त वर्ष भारत का निर्यात रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गया है और अर्थव्यवस्था की मज़बूती अब भी जारी है. आंकडों के अनुसार निर्यात में पिछले साल की तुलना में 24 फ़ीसदी की बढोत्तरी हुई और यह 80 अरब डॉलर पर पहुँच गया. लेकिन तेल की कीमतों में वृद्धि के कारण व्यापार घाटा 25 अरब डॉलर हो गया है. भारत अपनी ज़रूरतों का 70 प्रतिशत तेल आयात करता है और इसकी मांग में लगातार वृद्धि होती जा रही है जिससे व्यापार घाटा बढ़ रहा है. भारत के आयात में भी खासी वृद्धि हुई है और यह 105 अरब डॉलर तक पहुँच गया है. केंद्रीय उद्योग और वाणिज्य मंत्री कमलनाथ ने शुक्रवार को अपनी विदेश व्यापार नीति की वार्षिक समीक्षा की घोषणा की जिसमें निर्यात का लक्ष्य 92 अरब डॉलर रखा गया है. कमलनाथ का कहना था कि हमने निर्यात में 16 प्रतिशत वृद्धि का लक्ष्य रखा था लेकिन इसमें 24 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई. उनका कहना था कि निर्यात की यही वृद्धि दर जारी रही तो हन लक्ष्य को पार कर लेंगे. भारत सरकार ने सन् 2009 तक निर्यात का लक्ष्य 150 अरब डॉलर निर्धारित किया था. फ़िलहाल विश्व व्यापार में भारतीय निर्यात का हिस्सेदारी एक प्रतिशत से भी कम है. भारत सरकार ने अगले पाँच वर्षों में इस हिस्सेदारी को बढ़ाकर 1.5 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य रखा है. नई निर्यात नीति में मध्यम और लघु उद्योगों की निर्यात में अहम भूमिका देने की बात कही गई है. साथ ही सरकार ने कृषि उत्पादों पर से अतिरिक्त शुल्क हटाने का प्रस्ताव रखा है. |
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