|
यूरोपीय संघ-अमरीका का 'व्यापार युद्ध' गरमाया | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
यूरोपीय संघ ने पहली बार कई तरह के अमरीकी सामान पर लगातार बढ़ने वाला शुल्क लगाने की घोषणा की है. इससे अमरीकी कंपनियों को करोड़ों डॉलर का नुक़सान होगा. ऐसा पहली बार हुआ है कि आयात-निर्यात की लड़ाई में यूरोपीय संघ ने अमरीकी कंपनियों के सामान पर इतना अधिक शुल्क लगाया है. शहद से लेकर रोलर स्केट और परमाणु संयंत्रों पर शुल्क में पाँच प्रतिशत वृद्धि की गई है. ऐसा इसलिए किया गया है ताकि अमरीकी संसद अमरीकी निर्यातकों को फ़ायदा पहुँचाने के लिए बनाया गया एक क़ानून वापस ले. हर महीने ये शुल्क एक प्रतिशत बढ़ जाएगा और इससे 66.6 करोड़ डॉलर के वार्षिक अमरीकी निर्यात पर काफ़ी असर पड़ सकता है. अमेरिकन चेंबर ऑफ़ कॉमर्स के जॉन डिशारून का कहना है, "ये अमरीका और यूरोपीय संघ के व्यापार रिश्तों के लिए बहुत दुर्भाग्यपूर्ण दिन है." हाल ही में विश्व व्यापार संगठन ने अमरीका के यूरोपीय संघ और अन्य स्टील बनाने वाले देशों के ख़िलाफ़ लगाए प्रतिबंधों को अवैध ठहराया था. वर्तमान समस्या काफ़ी देर से चल रही है. विश्व व्यापार संगठन ने 2002 में कहा था कि बोइंग और माइक्रोसॉफ़्ट जैसी कंपनियों को निर्यात सब्सिडी देना उन्हें व्यापार में अन्यायपूर्ण फ़ायदा पहुँचाने जैसा है. यूरोपीय संघ के व्यापार आयुक्त पास्कल लैमी अमरीका जाकर वहाँ के नेताओं से इस विषय पर बातीचीत भी कर चुके हैं लेकिन समस्या का हल नहीं निकला है. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||