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इसराइली वापसी से ख़ुश हुए फ़लस्तीनी | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इसराइली सैनिकों की ग़ज़ा पट्टी से वापसी के बाद वहाँ हज़ारों की संख्या में फ़लस्तीनी इकट्ठा हो गए हैं. ग़ज़ा पट्टी में उत्सव जैसा माहौल है. लेकिन साथ में अव्यवस्था भी है. ग़ज़ा पट्टी से इसराइली सैनिकों की वापसी शुरू होने के बाद ही फ़लस्तीनी सुरक्षा बल के जवानों ने ग़ज़ा पट्टी में अपना राष्ट्रीय ध्वज फहरा दिया है. इसराइली सैनिकों ने ग़ज़ा छोड़ने से पहले ज़्यादातर इमारतों को तोड़ दिया था, लेकिन जो इमारतें बच गईं थी, वे फ़लस्तीनियों के निशाने पर है. कुछ इमारतों को लूट लिया गया तो कुछ में आग लगा दी गई. इनमें यहूदियों का एक उपासनास्थल (सेनेगॉग) भी शामिल है. इससे पहले इसराइली कैबिनेट ने इन उपासनास्थलों को न तोड़ने के पक्ष में मतदान किया था. लेकिन फ़लस्तीनी अधिकारियों ने यह स्पष्ट कर दिया था कि वे इन उपासनास्थलों की सुरक्षा की गारंटी नहीं ले सकते. फ़लस्तीनी अधिकारियों ने कहा कि वे इन उपासनास्थलों को तोड़ देंगे. इसराइली सैनिकों ने ग़ज़ा पट्टी से हटने से पहले वहाँ एक छोटा सा कार्यक्रम आयोजित किया. क़ब्ज़ा इसराइल ने 1967 में हुए मध्य-पूर्व युद्ध के बाद ग़ज़ा पट्टी पर क़ब्ज़ा किया था. उस दौरान अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद इसराइल ने ग़ज़ा पट्टी में यहूदी लोगों को बसने के लिए उत्साहित किया था. लेकिन 38 सालों बाद अब ग़ज़ा पट्टी से इसराइल ने पहले तो यहूदी बस्तियों को ख़ाली कराया और अब इसराइली सैनिक भी वहाँ से हटना शुरू हो गए हैं. सैनिकों की वापसी शुरू होने से पहले एक छोटे से कार्यक्रम में ग़ज़ा कमान के प्रमुख मेजर जनरल डैन हारेल ने उम्मीद जताई कि इससे शांति के नए युग की शुरुआत होगी. उन्होंने कहा, "हम एक नई शुरुआत कर रहे हैं. दोनों पक्षों की जनता के बेहतर भविष्य के लिए यह ऐतिहासिक मौक़ा है."
बीबीसी संवाददाताओं का कहना है कि अगले कुछ दिनों में फ़लस्तीनियों की ओर से यहाँ कई समारोह होंगे लेकिन अभी भी दोनों पक्षों के बीच कुछ मुद्दों पर मतभेद क़ायम हैं. फ़लस्तीनियों को अपनी ज़मीन तो वापस मिल रही है लेकिन अभी भी यहाँ कौन आ रहा है और कौन जा रहा है- इस पर इसराइल का नियंत्रण रहेगा. फ़लस्तीनियों का कहना है कि इसराइली सैनिकों की मौजूदगी भले की ख़त्म हो गई हो लेकिन क़ब्ज़ा अभी ख़त्म नहीं हुआ है. |
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