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हमास ने शीर्ष नेताओं के नाम बताए | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
फ़लस्तीनी चरमपंथी संगठन हमास ने पहली बार अपने शीर्ष सैनिक कमांडरों के बारे में जानकारी सार्वजनिक की है. हमास ने पहली बार अपने सात कमांडरों की तस्वीरें, उनके पद और उनके दायित्वों का ब्यौरा अपनी वेबसाइट और एक अख़बार में प्रकाशित किया है. इससे पहले हमास इन सूचनाओं को गोपनीय रखता था ताकि कहीं इसराइल इन कमांडरों की हत्या ना करवा दे. संवाददाताओं का कहना है कि हमास पिछले दिनों गज़ा से इसराइल की वापसी का श्रेय लेना चाहता है और ये ताज़ा क़दम इसी प्रयास का हिस्सा है. 1987 में गठित फ़लस्तीनी चरमपंथी संगठन हमास इसराइल का विरोध करता है और उसने कई बार इसराइल से जुड़े ठिकानों और लोगों पर हमले किए हैं जिनमें कई हमले आत्मघाती थे. परिचय और चेतावनी हमास ने अपने सैनिक नेतृत्व के बारे में जो जानकारी प्रकाशित की है उसमें सातों कमांडरों की तस्वीरों समेत उनका जीवन परिचय भी दिया गया है. उसमें बताया गया है कि वे संगठन में किस पद पर हैं, इसराइली जेलों में कितना समय काट चुके हैं और कितनी बार उनकी हत्या के प्रयास हुए हैं. इनमें 38 वर्षीय एक कमांडर अहमद ग़ल्दौर को ये कहते हुए बताया गया है,"आनेवाले दिन कठिन होंगे. हमें मज़बूत होना होगा और सब्र करना होगा..कुछ दिन तक हो सकता है कि कुछ ना हो. हमें और अधिक प्रशिक्षण चाहिए". गज़ा शहर में हमास के सैनिक कमांडर 33 वर्षीय राएद साद ने अपने बयान में फ़लस्तीनी नेता महमूद अब्बास की इस चेतावनी का जवाब दिया है कि फ़लस्तीनी इलाक़ों में सशस्त्र गुटों को अपनी गतिविधियाँ नहीं चलाने दिया जाएगा. राएद साद का कहना है,"सशस्त्र गुट हमारी सीमाओं की रक्षा करते रहेंगे क्योंकि हमें यहूदी सेनाओं का ख़तरा है. शत्रु वापस लौटने के बावजूद फिर आ सकते हैं". गज़ा स्थित बीबीसी संवाददाता का कहना है कि हमास ये दावा करता है कि उसने ही गज़ा से इसराइल को पीछे हटने पर मजबूर किया. संवाददाता के अनुसार संगठन ने अपने दावे को मज़बूत करने के लिए ही अपने कमांडरों के नाम सार्वजनिक किए हैं. |
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