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पार्टी बनाकर चुनाव में उतरा टैक्सी चालक | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान से 14 साल पहले ब्रिटेन आए काशिफ़ राना ब्रितानी संसदीय चुनाव में उतरे सौ के क़रीब दक्षिण एशियाई उम्मीदवारों में सबसे अलग हैं. भारतीय, पाकिस्तानी, श्रीलंकाई और बांग्लादेशी मूल के बाकी उम्मीदवार जहाँ किसी न किसी मुख्य धारा की पार्टी के सदस्य हैं, वहीं राणा ने अपनी ख़ुद की पार्टी बना रखी है. उन्होंने कहा कि उनकी ‘ब्रिटिश पब्लिक पार्टी’ ब्रिटेन में अल्पसंख्यकों की एकमात्र रजिस्टर्ड राजनीतिक पार्टी है. राना लंदन के इलफ़र्ड साउथ सीट से उम्मीदवार हैं. उनके मुक़ाबले तीनों मुख्य दलों के उम्मीदवारों समेत कुल चार उम्मीदवार हैं. पार्टी के गठन के फ़ैसले के बारे में राना कहते हैं, “मैंने साढ़े तीन साल तक लिबरल डेमोक्रेट्स से जुड़कर काम किया. मुझे लगा कि मैं इस पार्टी या अन्य मुख्य पार्टियों से स्वतंत्र रहते हुए ज़्यादा काम कर सकता हूँ.” गर्व राना गर्व से बताते हैं कि अपनी ब्रिटिश पब्लिक पार्टी का संविधान लिखने में उन्होंने सात महीने लगाए. वह इनकार करते हैं कि उनकी पार्टी सिर्फ़ एशियाई या जातीय अल्पसंख्यकों की पार्टी है. राना ने कहा, “मैंने अपनी पार्टी के नाम में जानबूझकर ‘पब्लिक’ शब्द का प्रयोग किया है. क्योंकि यह हर तबके की पार्टी है. हमें अंगरेज़ों का भी सहयोग चाहिए.” काशिफ़ राना ने कहा कि उनका पेशा ‘वेडिंग प्लानर’ का है लेकिन सर्दियों की रातों में वो टैक्सी चालक के रूप में काम करते हैं. काउंसिल टैक्स और ट्यूशन फ़ीस को पूरी तरह हटाने के पक्षधर राना ने अपने चुनाव घोषणा पत्र में बुजुर्गों और विकलांगों को विशेष सुविधाएँ के लिए काम करने का वादा किया है. इलफ़र्ड साउथ के मतदाताओं में आधे से ज़्यादा दक्षिण एशियाई मूल के हैं. ये तो छह मई को ही पता चलेगा कि काशिफ़ राना इस सीट पर पिछली बार भारी बहुमत से जीते लेबर पार्टी उम्मीदवार माइक गेप्स को कितना नुक़सान पहुँचा पाते हैं. |
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