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ब्रिटेन के चुनाव और सट्टेबाज़ी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ब्रिटेन के चुनावों के बारे में अगर सट्टेबाज़ों की माने तो प्रधानमंत्री की कुर्सी टोनी ब्लेयर के अलावा किसी के लिए फिलहाल खाली नहीं है. कोई भी सट्टेबाज़ ब्लेयर के अलावा किसी अन्य नेता या पार्टी पर पैसा नहीं लगा रहा है. सट्टेबाज़ों के पास अपने तर्क हैं. एक सट्टेबाज़ का कहना है कि ब्लेयर की हंसी नहीं बल्कि उनके चेहरे की लाली का भी फ़र्क पड़ता है. प्रधानमंत्री के चेहरे के रंग पर भी यहां अच्छा खासा विवाद चल रहा है. हालत यहां तक पहुंच गई है कि इसी बात पर सट्टा लग रहा है कि चुनाव ख़त्म होने के दिन तक टोनी ब्लेयर का चेहरा कैसा दिखेगा. थका हुआ या खिला हुआ. एक सट्टेबाज़ ने विलियम हिल नामक सट्टा कंपनी के साथ इसी बात पर शर्त लगाई है. विलियम हिल कंपनी चुनाव अभियान के दौरान लेबर पार्टी के पूर्व कम्युनिकेशन डायरेक्टर एलस्टर कैंपबेल की गिरफ्तारी पर भी सट्टा लगा रही है. सट्टा इस बात पर भी लग रहा है कि जॉन प्रेसकाट का प्रदर्शन कैसा रहेगा. पिछले बार अभियान के दौरान एक व्यक्ति के साथ उनकी मारपीट हो गई थी. उप प्रधानमंत्री के घर की छत पर ग्रीनपीस कार्यकर्ताओं के चढ़ आने के बाद प्रेसकॉट के साथ घूंसेबाज़ी पर विलियम हिल ने पैसा कम कर दिया है.
सट्टा बाज़ार को समझने वालों के अनुसार पूरे सट्टा बाज़ार से एक बात साफ़ निकल के आ रही है कि टोनी ब्लेयर फिर से प्रधानमंत्री बन सकते हैं लेकिन कुछ सट्टेबाज़ ऐसे हैं जो उनकी जीत के अंतर पर ज़बर्दस्त पैसा लगा रहे हैं. कंज़रवेटिव पार्टी की जीत की संभावना पर बहुत कम पैसा लग रहा है लेकिन जाहिर है अगर पार्टी जीतती है तो कुछ लोगों को ज़बर्दस्त फायदा होगा. कोरल नाम की सट्टा कंपनी तो इन चुनावों को बहुत ही नकारात्मक मान रही है और उनका कहना है कि सट्टा बाज़ार का बिजनेस पिछले चुनाव की तुलना में 50 प्रतिशत कम हो रहा है. |
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