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ब्रिटेन में चुनावों से जुड़ी जानकारी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ब्रितानी प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने घोषणा की है कि ब्रिटेन में पाँच मई को आम चुनाव होगा. उन्होंने महारानी एलिज़ाबेथ से मिलकर अगले सप्ताह संसद भंग करने की सिफ़ारिश भी की है. आइए ब्रिटेन में चुनावों से जुड़ी कुछ जानकारी हासिल करते हैं सवाल-जवाब के ज़रिए: सवाल: भारत में तो आमतौर पर चुनाव की घोषणा मतदान की तिथि से काफ़ी पहले कर दी जाती है. तो क्या ब्रिटन में ऐसा कोई नियम है? जवाब: इसका कोई तय नियम नहीं है. भारत की ही तरह ब्रिटेन में भी हर पाँच साल में नई संसद चुने जाने का प्रावधान है. इस समय-सीमा के भीतर प्रधानमंत्री कभी भी चुनाव करा सकते हैं. हाँ, कोई भी प्रधानमंत्री इस बात का ध्यान ज़रूर रखेगा कि चुनाव ऐसे समय कराए जाएँ जब उनकी पार्टी के जीतने की अधिक संभावना हो. सवाल: संसद भंग करने और चुनाव की घोषणा करने की प्रक्रिया क्या है? जवाब: ब्रिटन की राजनीतिक व्यवस्था बहुत पुरानी है और आज भी वो परंपराएँ निभाई जाती हैं. जैसे प्रधानमंत्री अपने निवास से राज प्रासाद जाता है, राजा या रानी से संसद भंग करने का आग्रह करता है उसके बाद अपने निवास लौट कर चुनाव की तारीख़ की घोषणा करता है. इसके बाद संसद में राजा या रानी का हुक्मनामा पढ़ा जाता है और संसद भंग हो जाती है. सभी सांसदों को अपने अपने कार्यालय छोड़ देने होते हैं और चुनाव अभियान की शुरुआत हो जाती है. सवाल: ब्रितानी चुनाव अभियान किस तरह का होता है? जवाब: ब्रिटन में चुनाव अभियान फीका रहता है. न विशाल जनसभाएँ होती हैं, और न ही भारत की तरह सड़कों पर भौंपू के सहारे पार्टी के लिए वोट मांगे जाते हैं, और न जगह-जगह पोस्टर लगाए जाते हैं. अधिकतर अभियान मीडिया के ज़रिए होता है. अख़बारों में विज्ञापन छपते हैं, रेडियो और टीवी पर जमकर बहस होता है और हर पार्टी को अपना राजनीतिक संदेश जनता तक पहुँचाने का समय मिलता है. सवाल: मतदान के दिन किस तरह का माहौल होता है और उस दिन क्या गतिविधियाँ रहती हैं? जवाब: मतदान का दिन आम दिनों जैसा ही होता है क्योंकि उस दिन छुट्टी नहीं होती. मतदान केंद्र सुबह आठ बजे से रात नौ बजे तक खुले रहते हैं. जिसे जब सुविधा हो मतदान कर सकता है. मतदान के लिए लंबी-लंबी कतारें भी नहीं लगतीं. पार्टी के प्रतिनिधि मतदान केंद्रों के बाहर रहते हैं और भीतर मतदान अधिकारी होते हैं जो हर मतदाता का नाम मतदाता सूची में जांच कर उसे मतपत्र देते हैं. मतदाता अपनी पसंदीदा पार्टी के उम्मीदवार के नाम के आगे क्रॉस या काटा लगाकर मतपत्र को मोड़कर मतपेटी में डाल देता है. महत्वपूर्ण बात ये है कि मतदान का अधिकार ब्रिटिश नागरिकों के अलावा ब्रिटेन में रहने वाले आयरिश और राष्ट्रमंडल के देशों के नागरिकों को भी होता है. इनकी कुल संख्या चार करोड़ चालीस लाख है. सवाल: भारत की तरह मतदाता के नाख़ून पर स्याही नहीं लगाई जाती. तो क्या धाँधली की गुंजाइश रहती है? जवाब: आमतौर पर धाँधली होती नहीं है. सब कुछ विश्वास पर चलता है. हाँ, इन दिनों डाक से वोट करने की प्रक्रिया को लेकर कुछ चिंताएँ ज़रूर हैं. ऐसी घटनाएं हुई हैं जब पार्टी कार्यकर्ताओं ने पोस्टल मतपत्र इकट्ठा किए, उन्हे ख़ुद ही भरा या फिर परिवार के मुखिया ने सभी सदस्यों के मतपत्र स्वयं भर दिए. |
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