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लेबर पार्टी के उतार-चढ़ाव | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
लेबर पार्टी का जन्म एक मज़दूर आंदोलन के कारण 1900 में हुआ और इस उद्देश्य के साथ कि पार्टी श्रमिक वर्ग की राजनीतिक आवाज़ बनेगी. पहला विश्वयुद्ध हुआ और इस दौरान एक राष्ट्रीय सरकार में लेबर प्रतिनिधि भी शामिल हुए और इस तरह पहली बार लेबर ने सत्ता का स्वाद चखा. चुनाव के बाद लिबरल पार्टी का प्रभाव कम होना शुरू हुआ और लेबर प्रमुख विपक्षी दल बनकर सामने आया. पहली बार सरकार बनी 1924 में और पहले लेबर प्रधानमंत्री बने रैम्से मैक्डॉनल्ड. मगर सरकार कुछ ही समय चली और फिर कंज़र्वेटिव दल उसी साल सत्ता में चला आया. पाँच साल बाद 1929 में मैक्डॉनल्ड फिर बहुत कम बहुमत से सरकार बनाने में सफल रहे लेकिन ये सरकार भी नहीं चली. दूसरा विश्वयुद्ध और एटली
दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान कंज़र्वेटिव नेता विंस्टन चर्चिल के नेतृत्व में गठबंधन सरकार बनी और उसमें लेबर नेता क्लीमेंट एटली उपप्रधानमंत्री बने. युद्ध ख़त्म होने के बाद 1945 में चुनाव हुआ और लेबर पार्टी ने ऐसी ज़बरदस्त जीत हासिल की स्वयं पार्टी के समर्थक भी स्तब्ध रह गए. पार्टी ने 393 सीटें हासिल कर स्वयं अपने दम पर सरकार बनाई. एटली सरकार ने सामाजिक और आर्थिक क्षेत्र में व्यापक बदलाव के लिए एक कार्यक्रम पेश किया. ब्रिटेन एक वेलफ़ेयर स्टेट बन गया और कोयला, इस्पात और रेल सेवा का राष्ट्रीयकरण हुआ. मगर 1951 में सत्ता फिर ख़िसककर कंज़र्वेटिव पार्टी या टॉरियों के हाथ में चली गई. इस बार लेबर पार्टी को सत्ता में लौटने में 13 साल लगे. हेरॉल्ड विल्सन
60 के दशक में हेरॉल्ड विल्सन ने अपने नेतृत्व से लेबर में नई जान फूँकी. 1964 में थोड़े बहुमत से पार्टी ने सरकार बनाई लेकिन 1966 में पिर ज़बरदस्त बहुमत हासिल किया. लेकिन फिर पाउंड की कीमत गिरने और आर्थिक संकट के कारण सरकार गिरी 1960 में कंज़र्वेटिव फिर लौटे. इसके बाद 1974 में दो बार चुनाव हुए और दोनों ही बार लेबर जीती. हेरॉल्ड विल्सन प्रधानमंत्री बने. मगर 1976 में अचानक हेरॉल्ड विल्सन ने ये कहते हुए इस्तीफ़ा देकर सबको चकित कर दिया कि वे उन मुद्दों में अपनी रूचि खो बैठे हैं जो बदल नहीं रहे. फिर जिम कालाहन प्रधानमंत्री बन गए और 1976-1979 तक सत्ता में रहे. ख़राब समय 1979 के चुनाव में लेबर सत्ता से बाहर हो गई और मार्गरेट थैचर ने कंज़र्वेटिव सरकार बनाई. इसके बाद टोरियों ने लगातार चार चुनाव जीते. तीन बार मार्गरेट थैचर के नेतृत्व में और एक बार जॉन मेजर के. 1981 में पार्टी में विभाजन भी हुआ और वाम गुट ने पार्टी नेता माइकल फ़ूट के नेतृत्व में सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी नामक अलग दल बना लिया. माइकल फ़ूट के बाद पार्टी के नेता बने नील किनॉक और उनके बाद जॉन स्मिथ. जॉन स्मिथ काफ़ी सम्मानित नेता थे लेकिन 1994 में अचानक दिल के दौरे के कारण उनकी मौत हो गई जो पार्टी के लिए बड़ा आघात साबित हुई. ब्लेयर और न्यू लेबर
जॉन स्मिथ के बाद पार्टी का नेतृत्व आया टोनी ब्लेयर के कंधों पर और उन्होंने नील किनॉक के द्वारा शुरू की गई पार्टी को आधुनिक बनाने की कोशिश को जारी रखा. 1996 में पार्टी ने एक मसौदा सामने रखा - न्यू लेबर, न्यू लाइफ़ फ़ॉर ब्रिटेन - जिसपर पूरे देश में पार्टी सदस्यों में चर्चा हुई और फिर इसपर मतदान हुआ. इसमें 1992 में पार्टी को संकट में डालनेवाली कर-नीति में सुधार किया गया और पाँच क्षेत्रों के लिए वादे किए गए - शिक्षा, अपराध, स्वास्थ्य, रोज़गार और आर्थिक स्थिरता. 95 प्रतिशत पार्टी सदस्यों ने न्यू लेबर का समर्थन किया. नया बदलाव काम कर गया और फिर 1997 में लेबर ने 419 सीटें जीतकर धमाकेदार रूप से सत्ता पर क़ब्ज़ा किया. टोनी ब्लेयर की अगुआई में लेबर पार्टी ने 2001 के चुनाव में भी प्रदर्शन दोहराया और 413 सीटें जीतीं. अब ब्लेयर यदि तीसरी बार सत्ता में आते हैं तो वे मार्गरेट थैचर के साढ़े 11 वर्ष तक सत्ता में रहने के रिकॉर्ड को तोड़ देंगे. |
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