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शुक्रवार, 29 अप्रैल, 2005 को 06:53 GMT तक के समाचार
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टोनी ब्लेयर की साख दांव पर
टोनी ब्लेयर
टोनी ब्लेयर ने विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान राजनीति में रुचि लेनी शुरु कर दी थी
ब्रिटेन के चुनाव हर पार्टी के लिए महत्वपूर्ण तो हैं लेकिन लगातार दो बार प्रधानमंत्री चुने जा चुके टोनी ब्लेयर के लिए इन चुनावों का ख़ास महत्व है क्योंकि उनकी साख दांव पर लगी हुई है.

लेबर पार्टी के नेता के रुप में 11 साल पूरे कर चुके टोनी ब्लेयर के नाम पर कई रिकार्ड हैं.

वो लेबर पार्टी के सबसे लंबी अवधि तक प्रधानमंत्री पद पर रहने वाले नेता हैं. दो बार पार्टी को ज़बर्दस्त जीत दिलाने में उनकी भूमिका रही है और तीसरी बार भी चुनाव से पहले के सर्वेक्षणों में लेबर पार्टी को बढ़त दिख रही है.

मारग्रेट थैचर के बाद पार्टी की कमान संभालने वाले टोनी ब्लेयर ने ब्रिटेन को आधुनिकतम बनाने का संकल्प किया और उनकी नई लेबर पार्टी के एजेंडे में थी शिक्षा, शिक्षा, शिक्षा.

इसके अलावा वो जनसुविधाओं में आमूलचूल बदलाव लाना चाहते थे और ब्रिटेन के यूरोप का दिल बनाने की उनकी ख्वाहिश थी. ब्लेयर ब्रिटेन की पार्टी राजनीति का भी स्वरुप बदलने की कोशिश में थे.

हालांकि अब 11 साल के बाद लगता है कि उनके प्रधानमंत्रित्व काल को सिर्फ़ एक बात के लिए याद रखा जाएगा और वो है इराक़ के ख़िलाफ़ युद्ध का फ़ैसला.

इसके अलावा चुनावों से पहले अपने वित्त मंत्री गोर्डन ब्राउन के साथ हुई गुप्त बैठक भी ख़ासी चर्चा में रहेगी. कहा जाता है कि इस बैठक में यह तय हुआ कि ब्लेयर, गोर्डन ब्राउन के लिए अपना पद कब छोड़ेंगे.

ब्लेयर और ब्राउन
ब्राउन को पद सौंपने के लेकर अटकलों का बाज़ार गर्म है

ब्राउन और ब्लेयर इन अफ़वाहों का खंडन करते रहे हैं. ब्लेयर पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि अगर वो तीसरी बार भी प्रधानमंत्री बनते हैं तो वह उनका अंतिम कार्यकाल होगा.

राजनीतिक जीवन

ब्लेयर ने अपना राजनीतिक जीवन शुरु किया 1982 में जब उन्होंने लेबर पार्टी के टिकट पर बीकन्सफ़ील्ड से उपचुनाव लड़ा और हार गए.

मध्यवर्गीय परिवार से आए ब्लेयर के पिता कंज़रवेटिव पार्टी के सांसद बनना चाहते थे लेकिन ख़राब स्वास्थ्य के कारण ऐसा संभव नहीं हुआ.

टोनी ब्लेयर की पढ़ाई प्रसिद्ध फेट्स पब्लिक स्कूल में हुई जिसके बाद वो ऑक्सफोर्ड और बार में पढ़े. विश्वविद्यालय में रॉक एंड रोल संगीत में रमने वाले ब्लेयर का विद्रोही चरित्र लोगों के सामने आया.

बाद में राजनीति में उनकी रुचि हुई. बीकन्सफील्ड से चुनाव हारने के बाद अगले साल उन्हें सेज़फ़ील्ड से टिकट दिया गया और वो चुनाव जीत गए.

उनकी पत्नी चेरी ब्लेयर भी राजनीति में रुचि रखती हैं और एक समय वो भी सांसद बनने की इच्छुक थीं लेकिन ऐसा हुआ नहीं.

पार्टी में कैरियर

टोनी और चेरी ब्लेयर
प्रधानमंत्री की पत्नी चेरी ब्लेयर की भी राजनीति में गहरी रुचि है

पार्टी में टोनी को आगे बढ़ने में कोई ख़ास दिक्कत नहीं हुई . नौकरी संबंधी मामलों के प्रवक्ता के तौर पर उन्होंने मारग्रेट थैचर द्वारा बनाए गए ट्रेड यूनियन क़ानूनो को वापस लेने से इंकार कर दिया.

हालांकि इसके बाद ही उन्होंने गोर्डन ब्राउन और पीटर मंडेलसन के साथ मिलकर अपने और नई लेबर पार्टी के लिए नई योजनाएं बनानी शुरु कर दी थीं.

जब पार्टी नेता जॉन स्मिथ का 1994 में आकस्मिक निधन हुआ तो ब्लेयर बने पार्टी नेता और ब्राउन उनके राइट हैंड मैन.

मीडिया प्रबंधन और काम

लेबर पार्टी को चुनावों में ज़बर्दस्त जीत मिली और टोनी ब्लेयर ने प्रधानमंत्री बनने के बाद कुछ साहसिक क़दम उठाए.

ब्रिटेन के 200 वर्षों के इतिहास में सबसे कम उम्र यानी 44 साल की उम्र में प्रधानमंत्री बनने वाले टोनी ब्लेयर ने बैंक ऑफ इंग्लैड में सुधार किए और प्रधानमंत्री कार्यालय में मीडिया प्रबंधन की शुरुआत की.

ये मीडिया प्रबंधन वास्तव में स्पिन मशीन भी कहा जाता है.

शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में ब्लेयर के सुधार थोड़े धीमे रहे लेकिन चलत ज़रुर रहे. 2001 में फिर जीत मिली और उसके बाद उन्होंने अस्पताल, शिक्षा और अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में कई विवादास्पद फैसले किए.

इराक़ युद्ध

टोनी ब्लेयर
इराक़ युद्ध के लिए याद रखा जाएगा ब्लेयर को

घरेलू मुद्दों को छोड़ दें तो ब्लेयर के प्रधानमंत्री काल में ऐसी कोई ख़ास बात नहीं हुई थी जिसे याद रखा जा सके लेकिन तभी 11 सितंबर की घटना घटी और उसके बाद जो हुआ, वो ब्लेयर युग की सबसे महत्वपूर्ण घटना बन गई.

पिछले कुछ महीनों में कई दस्तावेज़ सामने आए और हर हफ्ते प्रधानमंत्री पर इराक़ के ख़िलाफ़ बिना पुख्ता सबूतों के युद्ध छेड़ने और अमरीका का पिछलग्गू बनने के आरोप लगते रहे हैं.

ब्लेयर के स्वास्थ्य को लेकर भी अफवाहें उड़ी और संभावित पद छोड़ने को लेकर भी लेकिन पांच मई के चुनावों के लिए उन्हीं की अगुआई में लेबर पार्टी जीतने की कोशिश कर रही है.

18 साल तक भटकते रहने के बाद पार्टी की बागडोर थामकर पार्टी को रिकार्ड तोड़ चुनाव जीतवाने वाले इस नेता के बारे में इतना ही कहा जा सकता है कि उनका भविष्य वास्तव में उनके खुद के हाथ में है.

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