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बुधवार, 08 दिसंबर, 2004 को 02:50 GMT तक के समाचार
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प्रतिनिधि सभा में ख़ुफ़िया विधेयक पारित
न्यूयॉर्क
न्यूयॉर्क और वाशिंगटन में हुए हमलों के लिए ख़ुफ़िया विफलता को एक बड़ा कारण बताया गया था
अमरीकी संसद के निचले सदन प्रतिनिधि सभा ने देश की ख़ुफ़िया सेवाओं में सुधार करने के बारे में बने महत्वपूर्ण विधेयक को पारित कर दिया है.

इस विधेयक में 11 सितंबर के हमले की जाँच करनेवाले आयोग की सुझाई गई अधिकतर सिफ़ारिशों को शामिल किया गया है.

उम्मीद है कि ये विधेयक बुधवार को ऊपरी सदन सीनेट की मंज़ूरी के लिए सदन में लाया जाएगा.

इस विधेयक में राष्ट्रीय ख़ुफ़िया निदेशक नाम के एक नए पद की व्यवस्था की गई है जिसका काम 15 सुरक्षा एजेंसियों के ख़र्च और उनके काम-काज पर नज़र रखना होगा.

11 सितंबर 2001 को अमरीका में हुए हमलों की जाँच करनेवाले आयोग ने एक साल तक जाँच करने के बाद देश के लिए एक ख़ुफ़िया निदेशक बनाए जाने का सुझाव दिया था.

 अब हो सकता है कि 11 सितंबर को हम जिस भयानक अनुभव से गुज़रे वो दोबारा ना हो
जे रॉकफ़ेलर, डेमोक्रेट सीनेटर

साथ ही विधेयक में ये भी प्रावधान है कि संदिग्ध चरमपंथियों पर और कड़ाई से नज़र रखी जाए.

साथ ही हवाई अड्डों और सीमा पर सामान की जाँच और बेहतर करने के भी उपाय सुझाए गए हैं.

अब अगर सीनेट से भी विधेयक को मंज़ूरी मिल जाती है तो इसे फिर राष्ट्रपति के पास लाया जाएगा जिनकी मुहर लगने के बाद ये क़ानून बन जाएगा.

मतभेद

डिक चेनी और जॉर्ज बुश
चेनी और बुश ने जीत के बाद विधेयक के लिए समर्थन जुटाने में ख़ासी मेहनत की

इस विधेयक का डेमोक्रेट पार्टी के सांसदों ने समर्थन किया मगर कुछ रिपब्लिकन सांसद ये कहते हुए इसके विरोध में खड़े हुए कि इससे रक्षा विभाग का महत्व कम होगा.

उनका कहना है कि अभी अमरीकी रक्षा विभाग पेंटागन स्वतंत्र रूप से ख़ुफ़िया जानकारियाँ एकत्र करता है.

अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यु बुश ने रिपब्लिकन सांसदों को विधेयक के पक्ष में लाने के लिए अच्छी ख़ासी मेहनत की.

नवंबर में दोबारा राष्ट्रपति बनने के लिए चुनाव जीतने के बाद से राष्ट्रपति बुश और उपराष्ट्रपति डिक चेनी ने अपना सारा ध्यान इस विधेयक के लिए समर्थन जुटाने पर केंद्रित किया था.

डेमोक्रेट सीनेटर जे रॉकफ़ेलर ने विधेयक को प्रतिनिधि सभा की मंज़ूरी मिलने का स्वागत करते हुए कहा,"अब हो सकता है कि 11 सितंबर को हम जिस भयानक अनुभव से गुज़रे वो दोबारा ना हो".

उल्लेखनीय है कि न्यूयॉर्क और वाशिंगटन में हुए हमलों के लिए ख़ुफ़िया तंत्र की नाकामी को एक बड़ा कारण बताया गया था.

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