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गुरुवार, 22 जुलाई, 2004 को 17:06 GMT तक के समाचार
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रिपोर्ट का स्वागत किया बुश ने
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ग्यारह सितंबर के हमलों से पूरी दुनिया में खलबली मच गई
अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने 11 सितंबर 2001 को अमरीका पर हुए हमलों की जाँच करनेवाले आयोग की रिपोर्ट का स्वागत किया है.

जाँच आयोग ने पाया है कि अमरीकी सरकार नीति, क्षमता, प्रबंधन के स्तर पर असफल रही और उसमें कल्पना शक्ति का भी अभाव रहा.

आयोग का गठन अमरीकी संसद ने किया था.

आयोग की रिपोर्ट में कहा गया है कि राजनीतिक नेताओं और ख़ुफ़िया एजेंसियों ने इस्लामी चरमपंथियों के ख़तरे की गंभीरता को समझने में भूल की.

आयोग का कहना है कि व्यक्तियों और संस्थाओं को इस मामले में ज़िम्मेदारी स्वीकार करनी होगी.

आयोग ने सिफ़ारिश की है कि गुप्तचर सेवाओं का पूरी तरह कायापलट करने की ज़रूरत है ताकि नए आतंकवाद विरोधी केंद्र की स्थापना की जाए और सारी कार्रवाई की देख-रेख गुप्तचर निर्देशक करें.

स्वागत

रिपोर्ट के आने के बाद अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने आश्वासन दिया है कि वे आयोग की सलाह पर अमल करेंगें.

 ओसामा बिन लादेन और अल क़ायदा का आतंकवादी ख़तरा जनता, समाचार माध्यमों या फिर संसद में नीतिगत बहस का मुख्य मुद्दा नहीं था. पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन या फिर ग्यारह सितंबर से पहले बुश प्रशासन के लिए आतंकवाद राष्ट्रीय सुरक्षा का प्रमुख मुद्दा नहीं था
9/11 आयोग

उन्होंने कहा, "जहाँ सरकारी कार्रवाई की ज़रूरत होगी, हम कार्रवाई करेंगे."

आयोग की ये अंतिम रिपोर्ट दो साल की जाँच के बाद आई है.

इसमें गुप्तचर सेवाओं की तीखी आलोचना की गई है लेकिन आयोग के अध्यक्ष थॉमस कीन ने कहा, "आयोग ने किसी एक व्यक्ति को दोषी नहीं पाया है."

आयोग ने एक हज़ार से अधिक प्रत्यक्षदर्शियों से पूछताछ की और कई आधिकारिक दस्तावेज़ों की जाँच के बाद 600 पन्ने की रिपोर्ट दी है.

दस सदस्यों वाले इस आयोग का मानना था, "ग्यारह सितंबर के हमलों से गहरा सदमा तो लगा लेकिन इन हमलों से कोई हैरानी नहीं होनी चाहिए थी. "

रिपोर्ट के अनुसार इस्लामी कट्टरपंथियों ने पहले से ही अमरीकियों को मारने की अपनी नीयत स्पष्ट कर दी थी.

रिपोर्ट में ये भी कहा गया है, "इन हमलों से पहले सबसे बड़ी असफलता कल्पना शक्ति की थी. हमें नहीं लगता कि नेता ख़तरे की गंभीरता समझ पाए."

आयोग का कहना है, "ओसामा बिन लादेन और अल क़ायदा का आतंकवादी ख़तरा जनता, समाचार माध्यमों या फिर संसद में नीतिगत बहस का मुख्य मुद्दा नहीं था."

ये भी कहा गया, "पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन या फिर ग्यारह सितंबर से पहले बुश प्रशासन के लिए आतंकवाद राष्ट्रीय सुरक्षा का प्रमुख मुद्दा नहीं था."

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