|
बुश और चेनी से पूछताछ हुई | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश और उपराष्ट्रपति डिक चेनी से 11 सितंबर के हमलों की जाँच के लिए गठित संसदीय आयोग ने पूछताछ की है. आयोग ने उनसे क्या पूछा इसका कोई ब्यौरा नहीं दिया गया है. मगर समझा जाता है कि दोनों से मुख्य रूप से ये पूछा गया कि हमलों के बारे में पहले से मिली ख़ुफ़िया जानकारी को कितनी अहमियत दी गई. जॉर्ज बुश ने कुछ शर्तों को पूरा किए जाने के बाद ही गवाही दी. इनमें एक शर्त ये थी कि उपराष्ट्रपति डिक चेनी उनके साथ रहेंगे. साथ ही ये भी शर्त रखी गई थी कि पूछताछ सार्वजनिक तौर पर नहीं होगी और ना ही इसकी वीडियो रिकॉर्डिंग की जाएगी. व्यापक चर्चा पूछताछ के बाद राष्ट्रपति बुश ने कहा कि उनके पास छिपाने के लिए कुछ भी नहीं था और उन्होंने आयोग के साथ सौहार्दपूर्ण वातावरण में व्यापक विषयों पर चर्चा की. बुश ने कहा,"अगर मेरे पास कुछ छिपाने को होता तो मैं उनसे कभी नहीं मिलता". जाँच आयोग ने कहा कि दोनों नेताओं ने खरी-खरी बातें कहीं. आयोग के एक सदस्य, रिपब्लिकन सांसद जिम थॉम्पसन ने कहा कि सवाल मुख्य रूप से राष्ट्रपति से ही पूछे गए और उन्होंने सारे सवालों का जवाब दिया. जिम थॉम्पसन ने एक एजेंसी को बताया,"तनाव बिल्कुल नहीं था और राष्ट्रपति ने शानदार प्रदर्शन किया. काश अमरीकी जनता इसे देख पाती". स्थिति बीबीसी के वाशिंगटन संवाददाता का कहना है कि 11 सितंबर के हमलों को लेकर अमरीकी राष्ट्रपति कार्यालय को आम लोगों में दिन-ब-दिन बढ़ते असंदेह का सामना करना पड़ रहा है. संवाददाता का कहना है कि एक ताज़ा सर्वेक्षण से इस बात का साफ़ इशारा मिलता है कि बुश सरकार ने इस बारे में पूरा सच नहीं बताया है कि उसे हमलों से पहले क्या कुछ पता था. आयोग जुलाई के अंत तक अपनी रिपोर्ट तैयार करेगा. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||