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और समय चाहिएः सीआईए प्रमुख | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसी सीआईए के निदेशक जॉर्ज टेनेट ने कहा है कि ख़ुफ़िया तंत्र को अल क़ायदा और अन्य चरमपंथी ख़तरों से निपटने लायक बनाने में और पाँच साल लगेंगे. जॉर्ज टेनेट ने 11 सितंबर को अमरीका में हुए हमलों की जाँच के लिए गठित आयोग के सामने अपनी गवाही के दौरान ये माना कि ख़ुफ़िया एजेंसियों से ग़लतियाँ हुईं. उन्होंने कहा कि इन ग़लतियों के कारण हमले हो सके. उन्होंने आयोग को बताया कि अल क़ायदा से निपटने के लिए सही रणनीति तो अपनाई गई मगर हमले की निश्चित योजना का पता नहीं चल सका. जॉर्ज टेनेट ने कहा कि जुटाई गई विभिन्न सूचनाएँ सभी ख़ुफ़िया संस्थाओं तक पहुँच सकें, इस दिशा में काफ़ी कम व्यवस्था हो पाई है. क्लिंटन सरकार पर आरोप इससे पहले अमरीका के अटॉर्नी जनरल जॉन एशक्रॉफ़्ट ने मंगलवार को आयोग के सामने गवाही दी थी. उन्होंने आयोग से कहा कि पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन की सरकार के दौरान आतंकवाद से ख़तरों की तरफ़ बिल्कुल आँखें मूँद ली गई थीं. एशक्रॉफ़्ट ने कहा कि क़ानूनी पेचीदगियों की एक ऐसी दीवार खड़ी कर दी गई थी जिनमें ख़ुफ़िया सूचनाओं के मामले में प्रभावशाली तालमेल नहीं बनाया जा सका. सीआईए निदेशक जॉर्ज टेनेट के बाद अमरीकी जाँच एजेंसी एफ़बीआई के निदेशक रॉबर्ट मुलर को भी गवाही देनी है. 11 सितंबर 2001 को हुए हमलों के बाद एफ़बीआई और सीआईए के कामकाज की काफ़ी आलोचना हुई है. |
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