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गुरुवार, 08 अप्रैल, 2004 को 15:37 GMT तक के समाचार
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अल-क़ायदा की जानकारी थी राइस को
कोंडोलीज़ा राइस
राइस ने कहा कि वे ये समझीं कि ख़ुफ़िया एजेंसी एफ़बीआई अल क़ायदा के ख़तरे का समाधान कर रही है
अमरीका की राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार कोंडोलीज़ा राइस ने माना है कि उन्हें अमरीका में अल क़ायदा के दस्ते होने के बारे मे जानकारी दी गई थी.

ये जानकारी उन्हें राष्ट्रपति कार्यालय के आतंकवाद पर विशेषज्ञ रिचर्ड क्लार्क ने दी थी लेकिन राइस ने कहा कि उन्होंने ये समझा कि ख़ुफ़िया एजेंसी एफ़बीआई इस ख़तरे का समाधान करने में लगी हुई है.

उन्होंने कहा कि उन्होंने ये भी समझा कि इस बारे में राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से किसी कार्रवाई की ज़रूरत नहीं है.

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि क्लार्क की जानकारी में अल क़ायदा के हमलों के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं थी.

राइस ने ये विचार 11 सितंबर की घटनाओं की जाँच कर रहे स्वतंत्र आयोग के सामने अपने बयान में व्यक्त किए हैं.

राष्ट्रपति ख़तरा जानते थे

उन्होंने कहा है कि राष्ट्रपति बुश अल क़ायदा से पैदा हुए ख़तरे को अच्छी तरह समझते थे.

लेकिन उन्होंने ये भी कहा कि ग्यारह सितंबर से पहले व्यापक हमले के ख़तरे की ऐसी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं थी कि कार्रवाई की जा सके.

उन्होंने ये भी माना कि पिछले बीस साल से अमरीकी सरकारों ने अल क़ायदा के ख़तरे से निबटने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए.

उनका कहना था कि 'आतंकवादी' तो हम से लड़ाई कर रहे थे लेकिन हमने फ़िलहाल उनके ख़िलाफ़ लड़ाई शुरु नहीं की थी.

कोंडोलीज़ा राइस ने माना कि ग्यारह सितंबर 2001 से ये साख मिलती है कि जब ख़तरे के बादल मंडरा रहे हों तो इंतज़ार करना उचित नहीं है.

राइस ने ये भी माना कि क़ानूनी अड़चनों के कारण ख़ुफ़िया एजेंसियाँ अपनी जानकारी एक दूसरे के साथ नहीं बाँट पाईं लेकिन उन्होंने कहा कि अब आंतरिक सुरक्षा मंत्रालय इस काम में जुटा हुआ है.

विमानों का इस्तेमाल

उनका कहना था कि उनकी जानकारी के मुताबिक बुश प्रशासन के किसी भी वरिष्ट अधिकारी को इस्लामी चरमपंथियों के विमानों को मिसाइल की तरह इस्तेमाल करने की संभावना के बारे में सूचना नहीं दी गई थी.

राइस का कहना था कि बुश प्रशासन ने राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के आतंकवाद के विषय में सलाहकारों की सेवाओं का तब तक इस्तेमाल किया जब तक बुश प्रशासन ने इस बारे में अपनी रणनीति तैयार नहीं कर ली.

उनका कहना था कि रणनीति ये थी कि विदेशी सरकारों के साथ मिलकर अल क़ायदा के ख़िलाफ़ लड़ा जाए और अल क़ायदा को मिल रही धन-राशि को रोका जाए.

राइस का कहना था कि 'आतंकवादियों' की ताकत घट रही है और दुनिया की दो बर्बर सरकारों को (अफ़ग़ानिस्तान और इराक़ में) सत्ता से हटा दिया गया है.

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