|
बिल क्लिंटन ने आँखें मूंदीं:एशक्रॉफ़्ट | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका के अटॉर्नी जनरल जॉन एशक्रॉफ़्ट ने कहा है कि पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन की सरकार के दौरान आतंकवाद से ख़तरों की तरफ़ बिल्कुल आँख मूँद ली गई थीं. एशक्रॉफ़्ट ने 11 सितंबर 2001 को हुए हमलों से पहले के हालात की सुनवाई कर रहे आयोग के सामने पेश होकर यह बात कही है. एशक्रॉफ़्ट ने कहा कि क़ानूनी पेचीदगियों की एक ऐसी दीवार खड़ी कर दी गई थी जिनमें ख़ुफ़िया सूचनाओं के मामले में प्रभावशाली तालमेल नहीं बनाया जा सका. अगर ख़ुफ़िया एजेंसियों को यह अंदाज़ा हो गया होता कि अल क़ायदा अमरीका की मुख्य ज़मीन पर हमला करने की योजना बना रहा है तो देश की सेनाओं की पूरी ताक़त को सक्रिय किया जा सकता था. आयोग की एक प्रारंभिक रिपोर्ट में अमरीका की अंदरूनी सुरक्षा एजेंसी एफ़बीआई की इस बात के लिए आलोचना की गई है कि वह आतंकवाद के ख़तरे का पूर्वानुमान नहीं लगा सकी. रिपोर्ट में कहा गया है कि एफ़बीआई के आतंकवाद विरोधी प्रयास कमज़ोर ख़ुफ़िया सूचनाओं और पर्याप्त धन के अभाव में पूरी तरह कामयाब नहीं हो सके हैं. जॉन एशक्रॉफ़्ट ने आयोग को बताया कि जब उन्होंने अपना पद संभाला तो वह चाहते थे कि अल क़ायदा के शुरुआती हमलों के बाद ओसामा बिन लादेन को मारा जा सके और इसके लिए अमरीकी नीति में बदलाव हो. उन्होंने कहा कि जबकि क्लिंटन प्रशासन ने अल क़ायदा नेता को गिरफ़्तार करने की कोशिशों के सिवा ज़्यादा कुछ नहीं किया. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||