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चेतावनी को नज़रअंदाज़ नहीं कियाः बुश | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश अपने ऊपर लगाए गए इन आरोपों का ज़ोरदार खंडन किया है कि उन्होंने 2001 में अल क़ायदा के हमलों की चेतावनियों को नज़रअंदाज़ किया. अमरीकी राष्ट्रपति के एक पूर्व सहयोगी रिचर्च क्लार्क ने ये आरोप लगाए थे कि बुश इराक़ के मामले में ज़रूरत से ज़्यादा उलझे रहे जबकि अल क़ायदा की ओर से ख़तरा बढ़ता रहा. मगर इस आरोप को बेबुनियाद बताते हुए अब राष्ट्रपति बुश ने कहा है कि अगर उनके पास इस बारे में कोई जानकारी होती तो वे उसपर ज़रूर कार्रवाई करते. इससे पहले राष्ट्रपति बुश के दो सहयोगियों, विदेश मंत्री कॉलिन पॉवेल और रक्षा मंत्री डोनल्ड रम्सफ़ेल्ड ने भी बुश का साथ दिया. ये दोनों मंत्री मंगलवार को 11 सितंबर के हमलों की जाँच के लिए गठित स्वतंत्र आयोग के सामने पेश हुए. रम्सफ़ेल्ड ने कहा कि अगर हमलों से पहले ओसामा बिन लादेन को पकड़ लिया जाता या उन्हें मार दिया जाता तो भी हमले होते. वहीं विदेश मंत्री पॉवेल ने कहा कि राष्ट्रपति बुश शुरू से ही अल क़ायदा को तबाह करने के लिए प्रतिबद्ध थे. इससे पहले अमरीका के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन की सरकार में विदेश मंत्री मैडलीन ऑलब्राइट ने आयोग के सामने कहा कि नई बुश सरकार के प्रतिनिधियों को ऐसी जानकारियाँ सौंपी गई थीं जिनसे अल क़ायदा के ख़िलाफ़ क़दम उठाए जा सकते थे. |
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